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उत्तराखण्डः सिलक्यारा टनल में फिर गिरा मलबा! पोलगांव-बड़कोट छोर से डेढ़ किलोमीटर अंदर भूस्खलन से बढ़ी चिंता, निर्माण कंपनी ने जारी किया बयान

editor
  • Awaaz Desk
  • August 24, 2026 10:08 AM
Uttarakhand: Debris falls again in Silkyara Tunnel! Concerns rise following a landslide 1.5 km inside from the Polgaon-Barkot end; construction company issues a statement.

उत्तरकाशी। चारधाम सड़क परियोजना के तहत यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में एक बार फिर भूस्खलन का मामला सामने आया है। 21 अगस्त को सुरंग के पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब 1300 से 1500 मीटर अंदर पहाड़ी से मलबा गिरने की सूचना है। घटना के बाद सुरंग के भीतर मलबा फैल गया। इससे निर्माण कार्य के साथ सुरंग की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, निर्माण कंपनी ने किसी बड़े खतरे से इनकार करते हुए मलबा गिरने को सुरंग निर्माण के दौरान होने वाली सामान्य प्रक्रिया बताया है। सुरंग के अंदर मलबा गिरने की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। इसके बाद सुरंग निर्माण में सुरक्षा इंतजामों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। बताया जा रहा है कि घटना के बाद मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है और निर्माण कार्य को सामान्य रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सुरंग के पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर पहाड़ी से मलबा गिरा। निर्माण कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 1300 मीटर अंदर कुछ हिस्सा मलबे से प्रभावित हुआ है। मलबे को हटाने के लिए टीम काम कर रही है। निर्माण कंपनी नवयुगा इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीराम ने बताया कि निर्माणाधीन सुरंग में खुदाई के दौरान कुछ स्थानों पर मलबा गिरना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि सुरंग के पोलगांव छोर से करीब 1300 मीटर अंदर मलबा गिरा है, जिसे हटाने का काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, मौके पर किसी तरह की चिंताजनक स्थिति नहीं है और सुरंग में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जा रहा है।

2023 में 41 श्रमिक फंस गए थे सुरंग के अंदर
सिलक्यारा सुरंग में इस बार सामने आए भूस्खलन की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नवंबर 2023 में इसी सुरंग में बड़ा हादसा हुआ था। उस समय सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर भारी भूस्खलन होने के कारण निर्माण कार्य में लगे 41 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए थे। श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए करीब 17 दिनों तक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। तमाम चुनौतियों के बीच बचाव अभियान पूरा होने के बाद सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। उस हादसे के बाद सुरंग निर्माण में सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्र की भूगर्भीय परिस्थितियों को लेकर कई सवाल उठे थे। अब एक बार फिर सुरंग के अंदर मलबा गिरने की घटना सामने आने के बाद उस पुराने हादसे की यादें ताजा हो गई हैं। हालांकि, निर्माण कंपनी का कहना है कि वर्तमान घटना में किसी बड़े खतरे जैसी स्थिति नहीं है।


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