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उत्तराखण्डः सरकारी जमीन से जॉर्ज एवरेस्ट तक कांग्रेस के निशाने पर धामी सरकार! 142 एकड़ जमीन की 15 साल की लीज, यूआईआईडीबी की भूमिका पर उठाए सवाल

editor
  • Awaaz Desk
  • September 16, 2026 01:09 PM
Uttarakhand: Dhami government in Congress's crosshairs over George Everest land deal; questions raised regarding the 15-year lease of 142 acres and the role of UIIDB.

रुद्रपुर। उत्तराखण्ड में सरकारी विभागों की बेशकीमती जमीनों और संपत्तियों को लीज, पीपीपी और अन्य माध्यमों से निजी हाथों में देने को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रुद्रपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राज्य सरकार ने किसानों की जमीनों के बाद अब सरकारी विभागों की बहुमूल्य जमीन और संपत्तियों को भी निजी कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से सरकारी जमीनों और संपत्तियों को लंबी अवधि की लीज तथा पीपीपी मॉडल पर देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था में मुख्यमंत्री के स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। पार्टी का आरोप है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति की सिफारिश के बाद मुख्यमंत्री संबंधित विभाग की भूमि यूआईआईडीबी को हस्तांतरित करने पर अंतिम निर्णय लेते हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि समिति की ओर से करीब 1200 एकड़ यानी लगभग 6000 बीघा भूमि से जुड़े प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री स्तर से अंतिम स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि कई हजार बीघा जमीन के अन्य प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष और बड़ी संख्या में प्रस्ताव अनुशंसा समिति के पास लंबित हैं।

प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने मसूरी स्थित पार्क एस्टेट और जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की भूमि को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस का दावा है कि वर्ष 2023 में करीब 142 एकड़ सरकारी भूमि को ‘राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ को 15 वर्षों के लिए सालाना एक करोड़ रुपये की लीज पर दिया गया। कांग्रेस के मुताबिक इस लीज को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। कांग्रेस ने दावा किया कि जिस वर्ष यह भूमि लीज पर दी गई, उसी दौरान इस संपत्ति के विकास पर एशियन डेवलपमेंट बैंक से करीब 23 करोड़ रुपये का ऋण लेकर खर्च किया गया। पार्टी ने इसी आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि 15 वर्षों में सरकार को लीज से करीब 15 करोड़ रुपये ही प्राप्त होने हैं तो सरकारी धन से विकसित की गई संपत्ति के आर्थिक उपयोग और सौदे की शर्तों की समीक्षा आवश्यक है। कांग्रेस नेताओं ने इस लीज प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और निविदा प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के बीच कथित मिलीभगत के भी आरोप लगाए। हालांकि ये सभी आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। 

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार ने 17 अक्टूबर 2023 को उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कानून, 2023 लाकर सरकारी जमीनों और संपत्तियों के प्रबंधन तथा उनके निवेश और विकास के लिए नई व्यवस्था तैयार की। कांग्रेस का आरोप है कि इसी कानून के तहत गठित यूआईआईडीबी को अब सरकारी विभागों की जमीनों को लीज, पीपीपी या अन्य मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र को देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि सरकारी जमीन को यूआईआईडीबी के पास हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति की भूमिका है, जबकि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के चलते राज्य के विभिन्न विभागों की जमीन और संपत्तियों के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया अत्यधिक केंद्रीकृत हो गई है।

निरीक्षण भवन और होटलों पर भी नजर
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यूआईआईडीबी अब केवल खाली जमीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने सरकारी भवनों और महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित संपत्तियों को भी निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पार्टी के मुताबिक लोक निर्माण विभाग के करीब 25 निरीक्षण भवनों तथा पर्यटन विभाग के कुछ होटलों को लीज अथवा पीपीपी मॉडल पर निजी हाथों में देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है। कांग्रेस ने कहा कि इनमें से कई संपत्तियां ऐतिहासिक महत्व की हैं और ऐसी जगहों पर स्थित हैं जहां भविष्य में समान सरकारी भूमि उपलब्ध होना मुश्किल है। पार्टी का कहना है कि इन संपत्तियों का मूल्य केवल उनके वर्तमान बाजार मूल्य से नहीं, बल्कि उनके स्थान, ऐतिहासिक महत्व और सरकारी उपयोग की संभावनाओं से भी जुड़ा है। कांग्रेस नेताओं ने नैनीताल के पटुवाडांगर की करीब 14 एकड़ भूमि, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश स्थित लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन का भी उल्लेख किया। कांग्रेस के मुताबिक इन संपत्तियों को लीज अथवा पीपीपी मॉडल पर देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पार्टी ने दावा किया कि संबंधित निविदाओं की शर्तें इस तरह रखी गई हैं कि स्थानीय कारोबारी अथवा कंपनियों के लिए उनमें भाग लेना कठिन हो जाता है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी संपत्तियों को निजी क्षेत्र को देने के लिए निविदाओं में पात्रता की शर्तें बेहद कड़ी रखी गई हैं, जबकि संपत्ति के एवज में भुगतान की व्यवस्था अपेक्षाकृत आसान है। पार्टी का दावा है कि इससे बड़ी पूंजी वाली बाहरी कंपनियों को इन संपत्तियों तक पहुंच मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार को ऐसी संपत्तियों के मामले में पारदर्शिता, स्थानीय हित, दीर्घकालिक राजस्व और सार्वजनिक उपयोग जैसे पहलुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रक्रिया में इन सवालों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

जनहित की जमीनों के प्रस्ताव लंबित होने का आरोप
कांग्रेस ने सरकारी भूमि के उपयोग को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति की 15 मार्च 2024 की बैठक में देहरादून के रानीपोखरी क्षेत्र में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए करीब 10 एकड़ जमीन और पराग फार्म, किच्छा में राष्ट्रीय न्यायालयीय विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए करीब 50 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्तावों पर विचार किया गया था। कांग्रेस का दावा है कि दोनों राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से धन उपलब्ध होना था, लेकिन इन प्रस्तावों पर अब तक भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय नहीं लिया गया। पार्टी ने इसे सरकारी जमीन के उपयोग में प्राथमिकताओं को लेकर उदाहरण बताते हुए कहा कि जहां राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव लंबित हैं, वहीं निजी निवेश और पीपीपी से जुड़े प्रस्ताव तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने नैनीताल में एसटीपी प्लांट के लिए प्रस्तावित करीब पांच एकड़ भूमि सहित अन्य जनहितकारी परियोजनाओं से जुड़े भूमि प्रस्तावों पर भी निर्णय नहीं होने का दावा किया।


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