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उत्तराखण्डः ‘भंडारा किंग’ बाबा की भावुक विदाई! मौत के बाद परिजनों ने भी नहीं दिया साथ, हरिद्वार पुलिस ने निभाया बेटों का फर्ज

editor
  • Awaaz Desk
  • July 12, 2026 02:07 PM
Uttarakhand: Emotional farewell for ‘Bhandara King’ Baba! Even family abandoned him after death; Haridwar Police stepped in to perform the duties of sons.

हरिद्वार। हरकी पैड़ी के पास वर्षों तक श्रद्धालुओं से गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारा कराने की अपील करने वाले और ‘भंडारा किंग’ बाबा के नाम से देशभर में पहचान बनाने वाले रमाशंकर गुप्ता की आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है। ‘भंडारा कर दो बाबूजी,100 में पांच बाबा, 200 में 11 बाबा खाएंगे’ कहकर तीर्थयात्रियों से गरीबों के लिए भोजन कराने की अपील करने वाले रमाशंकर गुप्ता का दो दिन पहले उनका निधन हो गया था। आज रविवार को हरिद्वार पुलिस ने खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति के सहयोग से पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। अंतिम यात्रा के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों ने उन्हें कंधा देकर भावभीनी विदाई दी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर गया। रमाशंकर गुप्ता पिछले कई वर्षों से हरकी पैड़ी के समीप शिवसेतु पर बैठकर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं से गरीबों और जरूरतमंदों के लिए भंडारा कराने की अपील किया करते थे। उनकी अनोखी आवाज और सेवा भाव ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। समय के साथ उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और लोग उन्हें ‘भंडारा किंग’ बाबा के नाम से जानने लगे। हरिद्वार आने वाले हजारों श्रद्धालु उन्हें देखकर रुकते, उनकी अपील पर भोजन का भंडारा कराते और जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने में सहयोग करते थे। बीती 9 जुलाई को रमाशंकर गुप्ता का शव हरकी पैड़ी के पास स्थित एक सार्वजनिक शौचालय में मिला था।

सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया और नियमानुसार उनके परिजनों की तलाश शुरू की। इस बीच सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर तेजी से फैल गईए जिसके बाद पुलिस को उनके गृह जनपद और परिवार की जानकारी भी मिल गई। जांच में पता चला कि रमाशंकर गुप्ता उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के कुंजा गांव के रहने वाले थे। उनके कोई संतान नहीं थी और वह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। पुलिस ने उनके परिजनों से संपर्क कर अंतिम संस्कार में शामिल होने का अनुरोध किया, लेकिन निर्धारित समय तक कोई भी हरिद्वार नहीं पहुंचा। नियमानुसार 72 घंटे की प्रतीक्षा के बाद पुलिस ने उन्हें लावारिस श्रेणी में रखते हुए सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। रविवार को हरिद्वार पुलिस ने खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति के सहयोग से पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान हरकी पैड़ी चौकी प्रभारी संजीत कंडारी, खड़खड़ी चौकी प्रभारी नवीन नेगी, उपनिरीक्षक खेमेंद्र गंगवार सहित कई पुलिसकर्मी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर उन्हें कंधा दिया और अंतिम विदाई दी।

श्मशान घाट पर उपस्थित लोगों ने भी नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बताया जा रहा है कि कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद एक कंटेंट क्रिएटर उन्हें अपने साथ ले गया था, जहां उनके कई वीडियो भी बनाए गए। कुछ समय बाद वह वापस हरिद्वार लौट आए थे। उनकी अचानक हुई मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति के उपाध्यक्ष दुर्गेश पंजवानी ने बताया कि समिति लावारिस शवों का पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कराती है, जिसमें लगभग 10 हजार रुपये का खर्च आता है। उन्होंने कहा कि रमाशंकर गुप्ता का अंतिम संस्कार भी पूरे सम्मान और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराया गया। वहीं हरिद्वार के एसपी सिटी अभय सिंह ने बताया कि पुलिस ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अंतिम संस्कार कराया। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और मानवीय दायित्वों का निर्वहन भी पूरी संवेदनशीलता के साथ करती है। उन्होंने बताया कि रमाशंकर गुप्ता लंबे समय से हरकी पैड़ी क्षेत्र में रह रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद 72 घंटे तक परिजनों का इंतजार किया गया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने श्मशान घाट सेवा समिति के सहयोग से उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।


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