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उत्तराखण्डः मंत्री के आवास में जलभराव की शिकायत मिलते ही हरकत में आया सरकारी सिस्टम! नगर निगम के 40 कर्मचारी पहुंचे, ADM-एसडीएम समेत अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

editor
  • Awaaz Desk
  • September 11, 2026 12:09 PM
Uttarakhand: Government machinery swung into action immediately upon receiving a complaint about waterlogging at the minister's residence! Forty municipal corporation employees arrived, and officials—including the ADM and SDM—took charge of the situation.

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अतिक्रमण और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और आम जनता के लिए प्रशासनिक तत्परता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के कैंट रोड स्थित सरकारी आवास से जुड़ा है, जहां ड्रेनेज की समस्या के चलते आवास की दीवार को नुकसान पहुंचने की आशंका के बाद प्रशासन और विभिन्न विभागों का पूरा अमला मौके पर पहुंच गया। जानकारी के मुताबिक, मंत्री के सरकारी आवास के आसपास ड्रेनेज व्यवस्था प्रभावित होने के कारण गंदा पानी परिसर और लॉन की ओर पहुंच गया। इससे आवास की दीवार को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी। मामला सामने आने के बाद नगर निगम समेत संबंधित विभागों के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम शुरू किया गया। इसके बाद ADM प्रशासन स्मिता परमार की अगुवाई में SDM, तहसीलदार और अन्य विभागों के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ड्रेनेज सिस्टम का जायजा लिया और पानी के निकासी मार्ग में आ रही दिक्कतों की वजह तलाशने का प्रयास किया। जगह-जगह ड्रेनेज के ढक्कन खोले गए और अधिकारियों ने मौके पर जाकर पानी की स्थिति का निरीक्षण किया। मंत्री गणेश जोशी का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को मामले की जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, ड्रेनेज की समस्या के कारण उनके आवास के पूरे लॉन में सीवर का पानी भर गया था, जिसके बाद नगर निगम के करीब 40 कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। मंत्री ने कहा कि अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद वह भी पूरे मामले की जानकारी लेंगे। कैंट रोड का यह इलाका प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसी क्षेत्र में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का सरकारी आवास भी स्थित है और इसी मार्ग से मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल के आवास की ओर आवाजाही होती है। ऐसे में ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक सक्रियता चर्चा का विषय बन गई है। विपक्ष और आम लोगों की ओर से अब सवाल उठाया जा रहा है कि देहरादून शहर में ड्रेनेज जाम, जलभराव और अतिक्रमण की समस्याओं से आम नागरिक लंबे समय से जूझते हैं। ऐसे मामलों में शिकायतों के निस्तारण में अक्सर समय लग जाता है, लेकिन जब मामला एक मंत्री के सरकारी आवास से जुड़ा तो प्रशासनिक मशीनरी तत्काल सक्रिय नजर आई। फिलहाल, अधिकारियों ने ड्रेनेज समस्या के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पूरे मामले में यह भी देखा जा रहा है कि जल निकासी व्यवस्था बाधित होने की वजह क्या है और यदि कहीं अतिक्रमण हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि प्रशासन की ऐसी तत्परता आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में भी कब और कितनी दिखाई देगी।
 


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