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रोडवेज कर्मचारी यूनियन में दखल पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, लेबर कमिश्नर को 10 सप्ताह में फैसला लेने के निर्देश

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 07, 2026 12:07 PM
Uttarakhand High Court takes a stern view of interference in the Roadways Employees Union; directs the Labour Commissioner to make a decision within 10 weeks.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) के कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियन के अधिकारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने साफ किया है कि परिवहन निगम के बड़े अधिकारी नियमों के खिलाफ जाकर कर्मचारी यूनियनों के आंतरिक मामलों और उनकी कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की दखलअंदाजी नहीं कर सकते। रोडवेज कर्मचारी संघ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने इस मामले में लेबर कमिश्नर (श्रम आयुक्त) और श्रम रजिस्ट्रार को कड़े निर्देश जारी किए हैं।

न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लेबर कमिश्नर और उनके रजिस्ट्रार को आदेश दिया है कि वे इस पूरे विवाद के संबंध में परिवहन निगम के अधिकारियों और यूनियन के नेताओं के साथ तत्काल उच्चस्तरीय वार्ता करें। एकलपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि श्रम विभाग यह बारीकी से जांचे कि किस कानूनी आधार पर निगम के अधिकारी ट्रेड यूनियन के मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनन ट्रेड यूनियन के मामलों में दखल देने या नियमन करने का अधिकार केवल लेबर कमिश्नर या श्रम रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित है, निगम के प्रबंधन या प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं। हाई कोर्ट ने लेबर कमिश्नर को अगले 10 सप्ताह के भीतर दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर कानून के अनुसार अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। दरअसल, रोडवेज कर्मचारी संघ ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनकी यूनियन 'ट्रेड यूनियन नियमावली' के तहत पूरी तरह से पंजीकृत (रजिस्टर्ड) है। नियमावली और सेवा शर्तों के मुताबिक, निगम का कोई भी नियमित कर्मचारी इस संघ की सदस्यता स्वेच्छा से ले सकता है। यदि कोई सदस्य संघ के अनुशासन या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द करने या उस पर कार्रवाई करने का सर्वाधिकार सिर्फ और सिर्फ संघ के पास ही है। याचिका में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया था कि वर्तमान में परिवहन निगम के सचिव सहित कई अन्य उच्च अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर यूनियन के काम में अड़ंगेबाजी कर रहे हैं और पदाधिकारियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। संघ ने अदालत से गुहार लगाई थी कि अधिकारियों को इस अवैध हस्तक्षेप से तुरंत रोका जाए, क्योंकि यह अधिकार केवल श्रम न्यायालय और रजिस्ट्रार का है। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब रोडवेज के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।


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