उत्तराखण्डः भारत-चीन सीमा के पास कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर टूटी पहाड़ी! भारी भूस्खलन से तवाघाट-मलघाट सड़क बंद, दर्जनों वाहन फंसे
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में मानसून के बीच पहाड़ों के दरकने का सिलसिला लगातार जारी है। भारत-चीन सीमा के पास तवाघाट-गुंजी-कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। तवाघाट और मलघाट के बीच हुए इस भारी भूस्खलन के कारण सड़क पूरी तरह बंद हो गई। पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर और भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आने से मार्ग पर आवाजाही ठप हो गई और कई वाहन रास्ते में फंस गए। गनीमत रही कि भूस्खलन के वक्त सड़क पर कोई वाहन या व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है। बताया जा रहा है कि भूस्खलन से कुछ समय पहले पहाड़ी से छोटे-छोटे पत्थर और कंकड़ गिरने शुरू हो गए थे। खतरे को भांपते हुए मौके पर मौजूद लोग पहले ही सुरक्षित दूरी पर चले गए। इसके कुछ ही देर बाद देखते ही देखते पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा। चट्टानों के सड़क पर गिरने से वहां धूल का गुबार उठ गया और कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद लोगों ने पहाड़ी टूटने के इस खौफनाक मंजर को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर गिरते और सड़क पर मलबा जमा होते दिखाई दे रहा है। पांगला थाने में तैनात हेड कांस्टेबल सोबन सिंह बनग्याल के मुताबिक, पुलिस टीम कैलाश मानसरोवर यात्रा के पांचवें दल को लेने के लिए तवाघाट की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक भारी भूस्खलन होने से सड़क बंद हो गई।
उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का पांचवां दल फिलहाल तवाघाट में सड़क खुलने का इंतजार कर रहा है। मार्ग बहाल होने के बाद यात्रा दल को आगे गुंजी की ओर भेजा जाएगा। वहीं, धारचूला के उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि आदि कैलाश मार्ग पर भारी भूस्खलन के कारण सड़क बंद होने की सूचना मिली है। मार्ग को जल्द से जल्द खोलने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और सड़क को यातायात के लिए बहाल करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने की आशंका के चलते राहत और सड़क खोलने का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पिथौरागढ़ जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इससे पहले 21 जुलाई को दारमा घाटी के पंगबावे क्षेत्र में भी विशाल चट्टानें टूटकर सड़क पर आ गिरी थीं। भारी बोल्डर और मलबा आने से सोबला-ढाकर सड़क बंद हो गई थी। मार्ग को खोलने के लिए अभी भी अभियान जारी है। वहीं, कुछ दिन पहले बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले की सीमा के पास रमाड़ी ग्राम पंचायत के मुनधुरा तोक में भी भारी भूस्खलन हुआ था। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और चट्टानें नीचे आ गिरी थीं। हालांकि, इन सभी घटनाओं में राहत की बात यह रही कि समय रहते लोगों ने खतरे को भांप लिया और सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए। इसके चलते अब तक किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है।