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उत्तराखण्डः पंचायत उपचुनाव में नामांकन निरस्तीकरण का मामला! बीडीसी सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे महिपाल सिंह को हाईकोर्ट से झटका

editor
  • Awaaz Desk
  • October 09, 2026 12:10 PM
Uttarakhand: Issue regarding the cancellation of nomination for the Panchayat by-election! High Court deals a blow to Mahipal Singh, who was preparing to contest the BDC member election.

नैनीताल। उत्तराखंड में पंचायत उपचुनाव के दौरान बीडीसी सदस्य पद के लिए नामांकन निरस्त किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया है। महिपाल सिंह ने नामांकन निरस्त किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि पहली बार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत से नो ड्यूज सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने समय सीमा के बाद नो ड्यूज सर्टिफिकेट जमा किए जाने के आधार पर नामांकन निरस्त करने के फैसले को सही मानते हुए याचिका खारिज कर दी। बता दें कि प्रदेश में रिक्त पंचायत पदों पर उपचुनाव कराने के लिए 25 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी की गई थी। इसके तहत 25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी होनी थी, जबकि 3 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 12 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। इसी क्रम में पूर्व बीडीसी सदस्य भिकियासैण अल्मोड़ा जिले की मृत्यु के कारण रिक्त हुई बीडीसी सदस्य भिकियासैण सीट पर उपचुनाव होना है। इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए महिपाल सिंह ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन निर्धारित समय तक नो ड्यूज सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर पाने के कारण उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। नामांकन निरस्त किए जाने के खिलाफ महिपाल सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम की धारा 53(1)(ई) के तहत नो ड्यूज से संबंधित प्रावधान उन लोगों पर लागू होना चाहिए, जो पहले संबंधित पंचायत पद पर रह चुके हैं या वर्तमान में पद पर हैं। पहली बार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत से नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि नो ड्यूज सर्टिफिकेट निर्धारित समयसीमा यानी 1 अक्टूबर तक प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, जबकि याचिकाकर्ता ने इसे 3 अक्टूबर को पेश किया। ऐसे में समयसीमा के बाद प्रस्तुत प्रमाणपत्र के आधार पर नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। इसी के साथ हाईकोर्ट ने महिपाल सिंह की याचिका खारिज कर दिया 


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