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उत्तराखण्डः जीवनदायिनी कोसी नदी पर संकट का मामला हाईकोर्ट पहुंचा! अवैध निर्माण, नदी में डाला गया मलबा, प्रशासन व संबंधित पक्षों को नोटिस

editor
  • Awaaz Desk
  • June 17, 2026 02:06 PM
Uttarakhand: Issue regarding the threat to the life-sustaining Kosi River reaches the High Court! Notices issued to the administration and concerned parties over illegal construction and the dumping of debris into the river.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जनपद अल्मोड़ा के ग्रामीण क्षेत्र विमोला में कुछ लोगों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य का मलवा  अल्मोड़ा शहर की एक लाख से अधिक की जनता का प्यास बुझाने वाली कोसी नदी व ग्रामीणों के मुख्य मार्ग को क्षतिग्रस्त किए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग और निर्माण कार्य कर रहे पक्षकारों से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से प्रशासन के जवाब पर अपना जवाब पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान प्रशासन ने अपने जवाब में कहा कि जो निर्माण कार्य हो रहा है, वह अवैध है। उसका मलवा नदी में डाला गया है। मलवा डालने पर प्रशासन ने जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। आज मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में हुई। बता दें कि अल्मोड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चन्द्र जोशी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि अल्मोड़ा जनपद के ग्राम सियालीधार सहित अन्य ग्रामीणों द्वारा कोसी नदी में निर्माण कार्य का मलवा डालकर उसे क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। साथ में अल्मोड़ा शहर को जाने वाली पम्पिंग मशीन को भी नुकसान हो रहा है। जबकि निर्माण कार्य कर रहे लोगों द्वारा अपना मलवा जीवनदायिनी कोसी नदी में डालकर एक लाख से  अधिक लोगों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। जनहित याचिका में आगे कहा गया है कि इससे पर्यावरण को खतरा उत्पन्न होने के साथ ही कोसी नदी का पानी दूषित हो रहा है नदी से पूरे अल्मोड़ा जनपद के 1 लाख लोगों को पीने के पानी सप्लाई हो रही है। बरसात के समय वह कभी भी बाधित हो सकती है। याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि नदी में मलवा जमा होने से बरसात के दिनों में निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसलिए इसपर रोक लगाई जाए।


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