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उत्तराखण्डः बागेश्वर के कमलेश की मौत पर नेता प्रतिपक्ष आर्य ने जताया दुख! बोले- आत्महत्या नहीं बल्कि व्यवस्थागत संगठित हत्या, सरकारी फेलियर हुआ उजागर

editor
  • Awaaz24x7 Team
  • November 03, 2022 09:11 AM
 Uttarakhand: Leader of Opposition Arya expressed grief over the death of Kamlesh of Bageshwar! Said - not suicide but systematic organized murder, government failure exposed

देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बागेश्वर के फरसाली गांव निवासी 20 वर्षीय कमलेश गोस्वामी की मौत पर दुख जताते हुए इसे आत्महत्या नहीं बल्कि व्यवस्थागत संगठित हत्या बताया है। एक बयान में नेता प्रतिपक्ष आर्य ने कहा कि सरकार की नीतियों के परिणाम अब सामने आने लगे है। इसे आत्महत्या कंहे या असंवेदनशील सरकारी तंत्र द्वारा की गई हत्या? उन्होंने कहा कि कमलेश गोस्वामी द्वारा जो कि एनसीसी का सी सर्टिफिकेट पास था, फिजिकल में 100 नंबर आये फिर भी अग्निवीर परीक्षा में असफल होने पर सोशल मीडिया में पोस्ट डाल कर जीवन समाप्त करने ने अग्निवीर परीक्षा के प्रारूप पर प्रश्न चिन्ह लगाने के साथ-साथ बेरोज़गारी की भयावहता पर सरकारी फेलियर को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि ये आत्महत्या नहीं बल्कि व्यवस्थागत संगठित हत्या है यह वही तनाव है जो युवाओं को नौकरी न मिल पाने के कारण इस कदर तनाव में ला रहा है कि वे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि अग्निवीर भर्ती के मानकों को लेकर अभ्यर्थी पहले दिन से ही अपना विरोध दर्ज करते रहे हैं। कई अभ्यर्थी असफल होने के बाद प्रमाण-पत्र फाड़कर व अन्य तरीकों से नाराजगी जताते देखे गए हैं। कई युवा अंतिम अवसर में असफल होने पर काफी निराश देखे गए हैं। इससे पहले सैनिक बहुल उत्तराखंड में सैनिक भर्ती में असफल होने पर युवाओं की आत्महत्या की खबरें शायद ही सुनी गई हों लेकिन अग्निवीर भर्ती के मानकों को लेकर घर-घर में निराशा, आक्रोश व नाराजगी के स्वर साफ सुने जा रहे हैं। प्रतिभाशाली कमलेश गोस्वामी की आत्महत्या ने पर्वतीय इलाके के युवाओं के सेना में भर्ती के मानकों पर नये सिरे से गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं।
कहा कि सेना में भर्ती होने के लिए पहले उत्तराखंड के पर्वतीय युवाओं के लिए 163 सेमी ऊंचाई और 1600 मीटर की दौड़ के लिए 5ः40 मिनट का समय निर्धारित था, लेकिन अब अग्निवीर भर्ती में 170 सेमी ऊंचाई तथा दौड़ को 5ः00 मिनट पर सीमित कर दिया गया है। अग्निवीर भर्ती के मानकों को लेकर उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अगस्त महीने तक लोगों को यह कहकर गुमराह किया कि जल्द ही अग्निवीर भर्ती के मानकों में शिथिलता बरती जाएगी लेकिन किया कुछ भी नहीं। तमाम भर्तियों में लगातार हो रहे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही के नाम पर तमाम तरह के खिताबों के बावजूद भी कुछ न हो पाना किसी न किसी रूप में युवाओं का मनोबल खत्म कर रहा है।


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