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उत्तराखण्डः ऋषिकेश में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का जनसंपर्क कार्यालय बंद होने से लोगों में आक्रोश! मुख्यमंत्री दरबार जाने की तैयारी में कई धार्मिक संगठन, उठने लगे कई सवाल

  • Awaaz24x7 Team
  • November 23, 2022
Uttarakhand: Public relations office of Shri Badrinath-Kedarnath Temple Committee closed in Rishikesh, anger among people! Many religious organizations are preparing to go to the Chief Minister's court, many questions are being raised

देहरादून। चारधाम यात्रा के शुरूआती केन्द्र तीर्थ नगरी ऋषिकेश मंे श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के 50 वर्ष से चल रहे प्रचार-प्रसार, जनसंपर्क कार्यालय को बंद करने से लोगों में आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जनसंपर्क कार्यालय को तो बंद कर दिया गया, लेकिन केनाल रोड देहरादून मंदिर समिति अध्यक्ष का आफिस धड़ल्ले से चल रहा है। लोगों की मानें तो मीडिया कार्यालय श्रीनगर, विधि अधिकारी कार्यालय चमोली सहित अतिरिक्त कार्यालय संचालित हो रहे है। कई अभियंताओं को यह भी छूट है वह जहां चाहे जहां अपना कार्यालय बना दें। विगत दिनों 70 कर्मियों के स्थानांतरण में घोर अनियमितता सामने आई है। बताया जाता है कि कई प्रभावशाली कर्मचारियों, अधिकारियों को स्थानांतरण की लिस्ट में तो रखा गया है, लेकिन स्थानांतण के कालम में उनको यथावत दिखाया गया है। आरोप है कि देहरादून कार्यालय में मंदिर समिति ने अपने खास लोगों को बिठाया है। इस मामले को लेकर कई धार्मिक संगठन मुख्यमंत्री दरबार में जाने की तैयारी कर रहे है।

इधर ऋषिकेश में मंदिर समिति का कोई संपर्क कार्यालय न होने से तीर्थ नगरी में जनाक्रोश है। बता दें कि श्री बदरीनाथ धाम के फूलों से श्रृंगार से लेकर राशन, पूजा-सामग्री, दान, कपाट खुलने की तिथि तय होने के कार्यक्रम, तीर्थयात्रियों से संपर्क, मीडिया संबंधित कार्य यहां से संचालित होते हैं। ऋषिकेश के दानीदाताओं द्वारा श्री बदरीनाथ धाम का श्रृंगार किया जाता है। केदारनाथ धाम को फूल पहुंचाये जाते है। राशन सब्जी, पूजा सामग्री तक ऋषिकेश कार्यालय के माध्यम से मंदिर समिति को दी जाती है। इस बार कार्यालय बंद होने तथा ऋषिकेश में मंदिर समिति के किसी सक्षम अधिकारी के न बैठने से श्री बदरीनाथ धाम का सैकड़ों क्विंटल फूलों को वाहन से  पहुंचाने आदि की अनुमति पत्र आदि के लिए श्री बदरीनाथ पुष्प श्रृंगार समिति के दानीदाताओं भटकना पड़ा। जिसकी मंदिर समिति को परवाह नहीं रही। प्राचीन काल की बदरी-केदार पैदल यात्रा मे तीर्थनगरी ऋषिकेश अहम रही है। अफसोस की बात है कि जहां देश‌-विदेश में धार्मिक संस्थाओं के कार्यालय खोले गये हैं। वहीं मंदिर समिति में क्षेत्रवाद एवं भाई-भतीजावाद की हवा हावी है‌ और रही-सही कसर ऋषिकेश का प्रचार-जनसंपर्क कार्यालय पर भी ताला लगा दिया गया है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि मंदिर समिति मितव्ययता करना चाहती है मंदिर समिति में कई गुना अतिरिक्त स्टाफ बैक डोर से भरा गया है। वह मंदिर समिति को नहीं दिखाई दे रहा है। आरोप है कि मंदिर समिति को देहरादून से लेकर रामनगर, लखनऊ, महाराष्ट्र, बदरीनाथ, जोशीमठ की करोड़ों अरबों रूपये की जमीनों पर अवैध कब्जे नहीं दिखाई दे रहे है‌ इसके बावजूद दशकों से चल रहे कार्यालय को बंद किया जाना औचित्य से परे है।

ज्ञात हुआ है कि मंदिर समिति ऋषिकेश के प्रचार जनसंपर्क एवं मीडिया कर्मियों का स्थानांतरण जोशीमठ कार्यालय में कर दिया गया है। ऋषिकेश में ही मंदिर समिति का संपर्क कार्यालय स्थित रहा है यहां से भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने की तैयारी सहित भोग, पूजा, पुष्प आदि सामग्री पहुंचाई जाती है। डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत की तेल कलश यात्रा का भी अहम पड़ाव है। देश-विदेश के तीर्थयात्रा इसी कार्यालय से यात्रा संबंधित जानकारी प्राप्त करते है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि भरत मंदिर ट्रस्ट ने श्री बदरी. केदार मंदिर समिति को चंद्रभागा स्थित भूमि प्रचार कार्यालय को ही दी है। वहीं अब मंदिर समिति विश्राम गृह को भी   निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में मंदिर समिति द्वारा दानी दाता के संकल्प को मंदिर समिति द्वारा मालिक बन कर बदला जा रहा है जोकि समझ से परे है इस संबंध में कुछ वर्ष पहले भी ऐसी कोशिश हुई थी जिस पर भरत मंदिर ट्रस्ट ने आपत्ति की थी। वर्ष 2005-06 में भी मंदिर समिति के प्रचार कार्यालय ऋषिकेश को समाप्त करने की कोशिश हुई, तब दानी दाता भरत मंदिर ट्रस्ट के कहने पर समिति पीछे हटी थी। आरोप है कि दान की धन संपदा तथा दान की गई गाड़ियों में ठाटबाट करने वाले मंदिर समिति के पदाधिकारी अब यह भूल रहे है कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ किसी क्षेत्र विशेष के तीर्थ नही, बल्कि यहां से देश विदेश के लोग जुड़े है। यहां आनेवाला चढावा किसी मंदिर समिति पदाधिकारी के कहने से नहीं आता, यह तो सनातन आस्था है। लोगों का कहना है कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा के अहम पड़ाव ऋषिकेश स्थित कार्यालय को अधिक सशक्त किया जाये।

इस मामले में प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी चारधाम यात्रा की दृष्टि से ऋषिकेश में मंदिर समिति का कार्यकाल जरूरी समझते है।

वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने मंदिर समिति के ऋषिकेश कार्यालय को बंद किये जाने पर कहा है कि ऋषिकेश चारधाम यात्रा का मुख्य केंद्र है ऐसे में वह शीघ्र मंदिर समिति से बात करेंगे। इधर शहरी विकास मंत्री प्रेम चंद्र अग्रवाल का कहना है कि ऋषिकेश तीर्थ नगरी चारधाम यात्रा का मुख्य केंद्र है। सभी धार्मिक संस्थाओं के कार्यालय अस्तित्व में रहने चाहिए।

जबकि पूर्व सांसद मनोहर कांत ध्यानी ने कहा कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति कार्यालय को यथावत रखा जाये।

भरत मंदिर ट्रस्ट ऋषिकेश के महंत श्री वत्सल प्रपन्न शर्मा ने कहा कि दानी दाता ने जिस प्रयोजन हेतु भूमि दान दी है। मंदिर समिति भूमि प्रयोजन नहीं बदल सकती और ना ही दान की भूमि को निजी हाथों में देना चाहिए। क्योंकि मंदिर समिति का उद्देश्य धन कमाना नहीं बल्कि यात्रियों की सेवा करना है।

महंत विनय सारस्वत ने भी कहा कि तीर्थनगरी में बदरी-केदार मंदिर समिति का कार्यालय बना रहना चाहिए।

श्री बदरीनाथ धाम यात्रा से जुड़ी शीर्ष संस्था श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष विनोद डिमरी ने बदरीनाथ धाम यात्रा के मुख्य पड़ाव ऋषिकेश में प्रचार-जनसंपर्क कार्यालय बंद किये जाने को अधोगामी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि अन्य शहरों में भी मंदिर समिति कार्यालय खुलने चाहिए, न कि कोई संपर्क कार्यालय बंद होना चाहिए। कहा कि अति शीघ्र ऋषिकेश कार्यालय को पूर्ववत खोला जाये।

श्री बदरीनाथ पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश के अध्यक्ष राकेश बर्थवाल ने कहा कि ऋषिकेश में मंदिर समिति कार्यालय बंद होने से सेवा कार्य में दिक्कत होती है। इसके अलावा समाजसेवी राजे सिंह नेगी, समाजसेवी एवं उजपा नेता कनक धनाई ने श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा तीर्थनगरी से प्रचार-जनसंपर्क कार्यालय हटाने की भर्त्सना की है। कहा कि मुख्यमंत्री को ऐसे मामलों में संज्ञान लेना चाहिए।


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