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उत्तराखंड: उपनल कर्मचारियों को नियमित करने में देरी पर उठे सवाल! सरकार बोली- 1300 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा

editor
  • Awaaz Desk
  • May 19, 2026 12:05 PM
Uttarakhand: Questions raised over delay in regularizing UPNL employees! Government says it will incur an additional burden of 1300 crore rupees.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में वर्षों से लगे  उपनल संविदा कर्मचारियों को आदेश होने के बाद भी सरकार द्वारा नियमित नही क़रने और उन्हें चयनित वेतनमान नही दिये जाने तथा उनको दिए गए वेतन से जीएसटी काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। आज हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि इनको नियमित करने पर राज्य सरकार के ऊपर 1300 सौ करोड़ का अतरिक्त भार पड़ेगा। सरकार को इसके लिए अतरिक्त समय दिया जाय। याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि सरकार कोर्ट के आदेश का अनुपालन नही करना चाह रही है। बार-बार कोर्ट से समय मांगे जा रही है। जबकि यह कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। जिसपर कोर्ट ने सरकार से कहा है कि अगले 28 मई को सरकार ने क्या निर्णय लिया कोर्ट को अवगत कराएं। मामले के अनुसार संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष उनका पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में कोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के सम्बंध में एक आदेश जारी किया था। लेकिन इस आदेश पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया। न ही इसे उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में  लाया गया है। पूर्व में संघ की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका पर (उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनन्द बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड) की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की गयी थी।


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