• Home
  • News
  • Uttarakhand: Rising concerns over the drug trade prompt women to take up the lathi; they are patrolling at night to ensure the safety of 350 families.

उत्तराखण्डः नशे के कारोबार ने बढ़ाई चिंता तो महिलाओं ने उठाई लाठी! 350 परिवारों की सुरक्षा के लिए रात में कर रहीं पहरेदारी

editor
  • Awaaz Desk
  • August 24, 2026 11:08 AM
Uttarakhand: Rising concerns over the drug trade prompt women to take up the lathi; they are patrolling at night to ensure the safety of 350 families.

देहरादून। राजपुर थाना क्षेत्र के ओल्ड मसूरी रोड स्थित थानी गांव में नशे के बढ़ते कारोबार और रात के समय संदिग्ध लोगों की आवाजाही से परेशान महिलाओं ने अब खुद मोर्चा संभाल लिया है। गांव के करीब 350 परिवारों और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित 30 से 35 महिलाएं शाम से देर रात तक गांव की सड़कों पर निगरानी कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि पुलिस से शिकायत के बावजूद नियमित गश्त नहीं होने के कारण उन्हें खुद गांव की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। महिलाओं के मुताबिक, शाम करीब पांच बजे से उनकी पहरेदारी शुरू होती है, जो रात करीब 12 बजे तक चलती है। गांव के किसी हिस्से में बाहरी लोगों के नशा खरीदने के लिए पहुंचने की सूचना मिलते ही महिलाएं एक-दूसरे को फोन कर मौके पर पहुंचती हैं। इसके बाद संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर उन्हें वहां से वापस भेजने का प्रयास किया जाता है। स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से गांव में नशे का कारोबार बढ़ता दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि रात के समय कई अनजान लोग गांव में आते-जाते हैं। इनमें से कुछ लोग कथित तौर पर नशीले पदार्थ खरीदने के लिए पहुंचते हैं। महिलाओं के अनुसार, संदिग्ध लोगों की आवाजाही के कारण कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। महिला सुधा ने दावा किया कि गांव में पिछले छह-सात वर्षों से नशे की समस्या बढ़ती दिखाई दे रही है। रात में कई अनजान लोग तेज रफ्तार वाहनों से गांव की सड़कों से गुजरते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। महिलाओं का यह भी दावा है कि नशा खरीदने वालों में स्कूल और कॉलेज के छात्र भी शामिल होते हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें नशे के कारोबार से जुड़े सभी लोगों की पहचान या गतिविधियों की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन गांव में संदिग्ध आवाजाही को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। नशे के खिलाफ महिलाओं का यह अभियान अब गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। समूह में करीब 30 से 35 महिलाएं शामिल हैं। इनमें युवा महिलाओं के साथ बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हैं। किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही महिलाएं एक-दूसरे को फोन करती हैं और समूह में मौके पर पहुंचती हैं। महिलाओं के मुताबिक, घर के कामकाज के साथ रात में गांव की निगरानी करना आसान नहीं है, लेकिन बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने के लिए उन्होंने यह जिम्मेदारी उठाई है। बारिश के मौसम को देखते हुए बुजुर्ग महिलाओं की ड्यूटी का समय कम किया गया है। स्थानीय महिला सुनीता शर्मा का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने के कारण कुछ लोगों की ओर से महिलाओं को धमकियां भी मिलती हैं। महिलाएं किसी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहतीं और चाहती हैं कि पुलिस उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले।

शिकायत के बाद दो दिन रही पुलिस-पीएसी
महिलाओं का कहना है कि उन्होंने राजपुर थाना पुलिस और संबंधित अधिकारियों से नशे के कारोबार तथा संदिग्ध गतिविधियों को लेकर शिकायत की थी। शिकायत के बाद कुठाल गेट चौकी से पुलिसकर्मी गांव पहुंचे। महिलाओं के मुताबिक, करीब दो दिन तक एक पीएसी जवान और एक कांस्टेबल की तैनाती भी की गई थी। हालांकि, इसके बाद नियमित पुलिस गश्त नहीं होने का आरोप महिलाओं ने लगाया है। उनका कहना है कि 14 अगस्त के बाद गांव में पुलिस की नियमित मौजूदगी दिखाई नहीं दी। इसके बाद महिलाओं ने खुद रात में पहरा देने का निर्णय लिया। वहीं, राजपुर थाना प्रभारी पीड़ी भट्ट ने मामले में अलग पक्ष सामने रखा है। उनका कहना है कि थानी गांव में मंदिर को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा है। उनके अनुसार, गांव के लोगों द्वारा सपेरा बस्ती के लोगों को मंदिर में दर्शन करने से रोके जाने की बात सामने आई है और नशे का मुद्दा भी इसी विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस की ओर से मामले के दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर स्थिति पर नजर रखने की बात कही गई है। महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय तक लाठी-डंडे लेकर रात में गांव की निगरानी नहीं कर सकतीं। यह जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है। अब महिलाओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन देने की तैयारी शुरू कर दी है।


संबंधित आलेख: