उत्तराखण्डः सूचीबद्ध न्यूज पोर्टल्स के पत्रकारों की सात सूत्रीय मांग, बंद हो ठेकेदारी प्रथा! टेंडर प्रक्रिया में राज्य के न्यूज पोर्टल्स को ही किया जाए शामिल, सीएम धामी ने जताई सहमति
देहरादून। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज राज्य के कई पत्रकारों ने देहरादून सचिवालय में सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस दौरान इम्पैनल्ड न्यूज़ पोर्टल्स के पत्रकारों ने सीएम धामी के समक्ष अपनी 7 सूत्रीय मांगों को रखा और विस्तार से पत्रकार हित मे चर्चा की। पत्रकारों की मांग पर सीएम ने मौखिक सहमति जताते हुए कहा कि न्यूज़ पोर्टल्स पत्रकारों के हितों को किसी भी प्रकार प्रभावित नही होने दिया जाएगा। जल्द ही इस मामले में एक बढ़िया नीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में कार्य कर रहे न्यूज़ पोर्टल्स के पत्रकारों को प्राथमिकता दी जायेगी।

इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार अरुण शर्मा ने पत्रकारों के विभिन्न मुद्दों और उनकी समस्याओं को सीएम के समक्ष रखा और कहा कि जिस तरह आज सोशल मीडिया का ट्रेंड विश्वभर में व्यापक रूप से फैल रहा है उससे हमारा राज्य उत्तराखंड भी अछूता नही रहा। यहां तक पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी न्यूज़ पोर्टल्स की महत्ता को अपना रहे है। मुलाकात के दौरान वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल ने कहा कि न्यूज़ पोर्टल्स की मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है ताकि ये साबित हो सके कि सरकार की योजनाओं को बतौर पत्रकार कितनी प्राथमिकता दी गयी है। इसके अलावा न्यूज़ पोर्टल्स को लेकर कोई पॉलिसी भी बने और उसमे हर संगठन से एक पत्रकार को शामिल किया जाए। वरिष्ठ पत्रकार पंकज पंवार ने भी पत्रकारों के हितों और राज्य की विकास योजनाओं पर सीएम के साथ परिचर्चा की और पत्रकारों की मांगों को पूरा करने की अपील की। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने सभी सात सूत्रीय महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सूचना विभाग के अधिकारियों को जल्द कार्रवाई के निर्देश दिये हैं। मुलाकात के दौरान सचिव सूचना अभिनव कुमार, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चौहान, प्रतिनिधि मंडल से वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल, अरुण शर्मा, पंकज पंवार, अजित काम्बोज, आशीष नेगी, अवधेश नौटियाल, रमन जायसवाल, अमित अमोली, राकेश बिजल्वाण, सोनू कुमार, रतन नेगी, चंदन कैंतुरा आदि शामिल रहे।
पत्रकारों ने सीएम के समक्ष उठाई ये प्रमुख मांगे
1- सूचना विभाग द्वारा टीवी चैनलों व समाचार पत्रों की भांति न्यूज पोर्टलों के लिए भी जल्द से जल्द नीति का गठन कर ठकेदारी प्रथा को बंद किया जाये। नीति बनाने वाली कमेटी में सुझाव देने के लिए हमारे संगठन के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाये।
2- सूचना विभाग द्वारा जब तक नीति का गठन नहीं होता और टेंडर प्रक्रिया जारी रहती है ऐसे में विभाग द्वारा टीवी चैनलों व समाचार पत्रों की भांति विज्ञापन की न्यूनतम दर तय करके टेंडर प्रक्रिया सुचारु रखी जाये। पिछले टेंडरों में देखने में आया है कि कुछ लोग जानबूझकर इतनी कम दरें भरते हैं कि सरकार और पत्रकारों में टकराव हो। इसलिए न्यूज पोर्टलों की विभिन्न श्रेणियों के विज्ञापन की न्यूनतम दर टीवी चैनलों व समाचार पत्रों की भांति तय करने के बाद ही सूचना विभाग टेंडर प्रक्रिया शुरू करे।
3- जब तक नीति का गठन नहीं होता है तब तक के लिए पूर्व में सूचीबद्ध किए गए न्यूज़ पोर्टल्स को दुबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने के स्थान पर उन्हें पूर्व निर्धारित सूचीबद्धता में ही बनाये रखा जाय। टेंडर प्रक्रिया केवल नये न्यूज पोर्टलों को शामिल करने के लिए ही अपनाई जाये।
4- उत्तराखंड में रहकर कार्य करने वाले न्यूज पोर्टलों को ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाये। राज्य से बाहर के ऐसे न्यूज पोर्टलों को (जिनका वोटर आईडी कार्ड व अन्य दस्तावेजों में पता प्रदेश से बाहर का हो) टेंडर प्रक्रिया में शामिल न किया जाय।
5- सूचना विभाग द्वारा सभी श्रेणियों में सूचीबद्व न्यूज़ पोर्टल्स को प्रत्येक माह सम्मानजनक राशि का विज्ञापन दिया जाये। विगत 6 माह में सूचीबद्व न्यूज पोर्टलों को विज्ञापन के नाम पर ना मात्र की राशि देकर विभाग द्वारा महज खानापूर्ति की गई है ।
6- मुख्यमंत्री के क्रियाकलापों व जनहित से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को लेकर स्पेशल आर्टिकल लिखने वाले न्यूज़ पोर्टल्स को स्पेशल विज्ञापन की परिधि में सम्मिलित किया जाय। सामान्य विज्ञापनों के साथ समय-समय पर स्पेशल विज्ञापन जारी किये जायें।
7- सूचना विभाग में सूचीबद्व न्यूज़ पोर्टल्स के संपादक को उनके पत्रकारिता अनुभव के आधार पर राज्य/ जिला मान्यता की सुविधा प्रदान की जाये।