उत्तराखंड: मतदाता सूची के दावों-आपत्तियों के निस्तारण पर रहेगी सख्त नजर,9 पर्यवेक्षण अधिकारी तैनात
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेश के तहत राज्य में संचालित मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान प्राप्त होने वाले दावों और आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए 9 पर्यवेक्षण अधिकारियों को तैनात किया गया है।
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के तहत मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया अब कड़ी निगरानी में होगी। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने नौ आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया है। ये अधिकारी संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में दावे-आपत्तियों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और इसकी नियमित रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, पर्यवेक्षण अधिकारियों की तैनाती हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों में की गई है। इन जिलों में मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों की संख्या तथा प्रक्रिया की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश के मुताबिक हरिद्वार जिले में डॉ. संदीप तिवारी, ललित नारायण मिश्र, नंद कुमार और गोपाल राम बिनवाल को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया गया है। नैनीताल में संजय कुमार और विनीत तोमर को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं ऊधमसिंह नगर में प्रकाश चंद्र दुम्का, जय किशन और दिवेश शाशनी को पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया है। नामित अधिकारी अपने-अपने जिलों के संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में एसआईआर से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण करेंगे। उनका मुख्य दायित्व यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावों और आपत्तियों का निस्तारण निर्धारित नियमों और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत किया जाए। पर्यवेक्षण अधिकारियों को केवल अंतिम निस्तारण ही नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी। इसमें नोटिस वितरण, नोटिस की तामीली और सुनवाई जैसे महत्वपूर्ण चरण शामिल हैं। अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हो रहा है या नहीं। निर्देशों में दावे और आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से गलत तरीके से न हटे और अपात्र नामों को लेकर उठाई गई आपत्तियों का भी नियमानुसार परीक्षण हो। नियुक्त पर्यवेक्षण अधिकारियों को अपने क्षेत्र के दैनिक निरीक्षण की रिपोर्ट नियमित रूप से तैयार करनी होगी। यह रिपोर्ट सप्ताह में दो बार संबंधित मंडलायुक्त के माध्यम से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजी जाएगी। रिपोर्टिंग के लिए मतदाता सूची पर नियमावली-2023 के अध्याय-11 में निर्धारित पुनरीक्षण प्रक्रिया और रिपोर्टिंग प्रारूप का पालन करना अनिवार्य होगा। इससे निगरानी प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की गई है। आदेश के अनुसार निर्धारित पुनरीक्षण अवधि तक नामित सभी अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन रहेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं की नजर बनी हुई है। ऐसे में तीन जिलों में नौ अधिकारियों की तैनाती को प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब दावे-आपत्तियों के निस्तारण से लेकर नोटिस और सुनवाई तक हर चरण की रिपोर्ट निर्वाचन विभाग के उच्च स्तर तक पहुंचेगी।