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उत्तराखंडः रामपुर तिराहा कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि! सीएम धामी बोले- आंदोलनकारियों के त्याग से बना प्रदेश, शहीदों के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास

editor
  • Awaaz Desk
  • October 02, 2026 12:10 PM
Uttarakhand: Tribute to the martyrs of the Rampur Tiraha incident! CM Dhami says the state was formed through the sacrifices of the agitators; foundation stone laid for the martyrs' memorial site.

देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का सबसे पीड़ादायक अध्याय माने जाने वाले रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर शुक्रवार को शहीद आंदोलनकारियों को पूरे प्रदेश में श्रद्धापूर्वक याद किया गया। मुजफ्फरनगर स्थित रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुंचे और शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने रामपुर तिराहा कांड की बरसी को काला दिवस के रूप में मनाया और स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने आंदोलनकारियों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य लंबे संघर्ष और आंदोलनकारियों के त्याग से अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण की लड़ाई में आंदोलनकारियों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया और मातृशक्ति ने भी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने शहीदों के सपनों के अनुरूप सशक्त और समृद्ध उत्तराखंड बनाने को सरकार की जिम्मेदारी बताया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर रामपुर तिराहा कांड के सात शहीदों के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास भी किया। इसके लिए 27 लाख रुपये की स्वीकृति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही शहीद आंदोलनकारियों के घरों के पास भी उनकी मूर्तियां स्थापित करने की घोषणा की गई है। रामपुर तिराहा कांड 2 अक्टूबर 1994 को उस समय हुआ था, जब अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे। रामपुर तिराहा पर हुई पुलिस गोलीबारी में सात आंदोलनकारी शहीद हुए थे। इन शहीदों की स्मृति में हर साल यहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

उधर, गैरसैंण में रामपुर तिराहा कांड की बरसी को लेकर अलग तस्वीर देखने को मिली। रामलीला मैदान में कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, स्थायी राजधानी संघर्ष समिति और राजधानी गैरसैंण समिति से जुड़े लोग एकत्र हुए। यहां वीरचंद्र सिंह गढ़वाली की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शहीद आंदोलनकारियों को याद किया गया और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम के दौरान गांधी जयंती के अवसर पर ‘रघुपति राघव राजा राम’ का गायन भी किया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। रामलीला मैदान से नगर पंचायत कार्यालय होते हुए मुख्य चौराहे तक रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्थायी राजधानी के मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। स्थायी राजधानी संघर्ष समिति गैरसैंण के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि गैरसैंण में उठाई जा रही आवाज को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने सरकार से राजधानी के मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की। वहीं राजधानी गैरसैंण समिति के संयोजक और पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि स्थायी राजधानी की मांग को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रहेगा। उनके मुताबिक 18 अक्टूबर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में क्रमिक अनशन शुरू करने की रणनीति बनाई गई है। उत्तराखंड क्रांति दल के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशुतोष नेगी ने रामपुर तिराहा कांड को राज्य आंदोलन का बेहद पीड़ादायक अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर का दिन उत्तराखंड के लोगों के लिए शहीद आंदोलनकारियों को याद करने और उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का अवसर है।


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