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उत्तराखंड : देवभूमि की कई जगहों के नामों के अंत मे खान क्यो लगा है? जानिए इसके पीछे का सच

editor
  • Awaaz24x7 Team
  • September 29, 2021 06:09 AM
Uttarakhand: Why is there a Khan at the end of the names of many places of Devbhoomi? Know the truth behind it

देवभूमि उत्तराखंड नाम सुनते ही ईश्वरीय एहसास होने लगता है।देवभूमि के नाम से उत्तराखंड सिर्फ देश ही नही बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया कि उत्तराखंड में कई जगह ऐसी है जिनके नामो के अंत मे खान शब्द जुड़ा होता है। ये सुनते ही आपको उर्दू भाषा या मुस्लिम धर्म ध्यान आ गया होगा। आखिर देवभूमि उत्तराखंड के कई इलाकों में खान शब्द क्यो और कैसे जुड़ा आइये जानते है।


दरअसल उत्तराखंड के जिन क्षेत्रों के नामो के आखिरी में खान शब्द जुड़ा है वो "खान" उर्दू नही बल्कि संस्कृत भाषा के खंड से बना है।जी हां !यहाँ खान का अर्थ कोई जात या धर्म नही है बल्कि इसका अर्थ एक खण्ड या हिस्सा होता है।उत्तराखंड के घरों के किसी एक हिस्से,कोने को खन कहा जाता है यही से लोगो ने पहाड़ी भाषा बोलते हुए ज़मीन के टुकड़े के नाम के आगे खन लगाना शुरू किया जो धीरे धीरे खान के रूप में इस्तेमाल होने लगा। इस तरह आम बोलचाल की भाषा मे उत्तराखंड के कई क्षेत्रों के एक बड़े टुकड़े या गांव इत्यादि के नामों के अंत मे खान लगना शुरू हो गया। जैसे भतरौचखान,नथुआ खान,कफड़ खान,बल्दिया खान,चीना खान,मंगली खान,ज्योली खान,कैला खान,काफली खान,कलिका खान इत्यादि ऐसी कई जगह है जिनके नामों के अंत मे खान लगा है और इसका अर्थ एक खण्ड या टुकड़ा है।


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