उत्तराखंड महिला आरक्षण कानून को हाईकोर्ट में चुनौती! सरकार से मांगा जवाब
उत्तराखंड में महिलाओं को सरकारी सेवा में मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण की संवैधानिक वैद्यता को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है। अदालत ने फिलहाल सरकार से छह सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले को उत्तराखंड संयुक्त राज्य इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा, 2021 में शामिल उम्मीदवार काजल तोमर की ओर से चुनौती दी गयी है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पकंज पुरोहित की युगलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार ने इंजीनियरिंग के पदों को भरने के लिये वर्ष 2021 में विज्ञप्ति जारी की लेकिन 2022 में सरकार ने उत्तराखंड की महिलाओं के लिये अधिवास के आधार पर 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डा0 कार्तिकेय हरिगुप्ता ने अदालत को बताया कि महिला उम्मीदवारों को अधिवास के आधार पर दिया जाने वाला आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है। राज्य विधानमंडल के पास ऐसा कानून बनाये जाने की कोई विधायी शक्ति नहीं है। अंत में पीठ ने सरकार को इस मामले में छह सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने के निर्देश दिये। हालांकि अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी और नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक नहीं लगायी। अदालत ने सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिये। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया के परिणाम याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे।