उत्तराखण्डः यशपाल आर्य का धामी सरकार पर सरकारी संपत्तियां लुटाने का खुला आरोप! बोले- होटल के लिए सीवर प्लांट हटाया और कौड़ियों के भाव पूंजीपतियों को बांटी जा रहीं ऐतिहासिक धरोहरें
हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर सरकारी जमीनों, ऐतिहासिक धरोहरों और जनता के संसाधनों को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास के नाम पर सरकारी संपत्तियों की खुली लूट चल रही है और यह सब प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। आर्य ने सरकारी फैसलों की विसंगतियों को उजागर करते हुए बताया कि नैनीताल शहर के बहुप्रतीक्षित सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जिलाधिकारी ने स्पष्ट रिपोर्ट दी थी कि पटवाडांगर के अलावा कोई उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं है। यह प्लांट एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की योजना में भी स्वीकृत हो चुका था। इसके बावजूद अगस्त 2025 में इस आधार पर सीवर प्लांट को वन भूमि पर ले जाने का फरमान सुना दिया गया कि इससे प्रस्तावित निजी होटल प्रोजेक्ट पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पटवाडांगर की 13.64 एकड़ बेशकीमती जमीन, जिसका वास्तविक बाजार मूल्य 82 करोड़ रुपये से अधिक है, उसे 90 साल की लीज पर केवल 37.80 करोड़ के रिजर्व प्राइस और महज 5 रुपये प्रति वर्गमीटर सालाना के टोकन रेंट पर निजी कंपनी को थमाया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पटवाडांगर ब्रिटिश काल से देश का प्रतिष्ठित वैक्सीन संस्थान रहा है। अब इस ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ 1871 में बने ज्योलीकोट निरीक्षण भवन को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह स्थिति केवल एक जगह की नहीं है। 1899 में बना रामगढ़ निरीक्षण भवन व 15 एकड़ भूमि, कैंची धाम मार्ग पर 1878 का रातीघाट निरीक्षण भवन, 1866 का रानीबाग निरीक्षण भवन, राज्य के खजाने से खरीदी गई एचएमटी रानीबाग की 53 एकड़ जमीन और कॉर्बेट सीमा पर पाटकोट की 37 एकड़ जमीन को भी निजी होटल समूहों को दिया जा रहा है।
उन्होंने गंभीर अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा कि विकासनगर के डाकपत्थर में बंदोबस्त की प्रक्रिया जारी थी, फिर भी दिसंबर 2025 में बिना खसरा संख्या दर्ज किए भूमि आवंटित कर दी गई। वहीं, धनौल्टी-मगरा में जमीन देने के बाद विभाग को पता चला कि वहां पहले से वन विभाग के पट्टे आवंटित हैं। सरकार के अपने दस्तावेजों में लिखा है कि जमीन के मूल्यांकन और लैंड बैंक पर आगे चर्चा होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब न लैंड बैंक बना, न पैमाइश हुई, न मूल्यांकन हुआ और न ही संबंधित विभागों की सहमति ली गई, तो आखिर जमीनें लुटाने की यह हड़बड़ी क्यों है? आर्य ने आरोप लगाया कि राज्य में जल विद्युत और सड़क परियोजनाओं के क्षतिपूरक वनीकरण के लिए सरकार के पास जमीन का टोटा है। किशाऊ बांध के लिए ही 2,000 एकड़ भूमि चाहिए, जो सरकार जुटा नहीं पा रही। भूमिहीन दलितों और आदिवासियों को सिर छिपाने के लिए आवास की जमीन नहीं दी जा रही, लेकिन पूंजीपतियों को 1,232 एकड़ जमीन कौड़ियों के भाव बांटी जा रही है। यह वंचितों के हक पर डाका है। जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ जमीन भी महज 1 करोड़ रुपये सालाना किराये पर दे दी गई। नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी देते हुए मांग की कि सरकार सभी निविदाएं तत्काल निरस्त करे, मुख्यमंत्री को सरकारी भूमि पर एकाधिकार देने वाला 22 दिसंबर 2022 का कैबिनेट निर्णय वापस लिया जाए और जॉर्ज एवरेस्ट लीज मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराई जाए। उन्होंने संकल्प दोहराया कि उत्तराखंड की अस्मिता और जमीनों की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़क से सदन तक लड़ेगी।