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ब्रिटिश नौसेना की गिरफ्त में उत्तराखंड के जांबाज कैप्टन अजय पंत,परिवार ने लगाई मदद की गुहार

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 22, 2026 10:06 AM
Uttarakhand's brave Captain Ajay Pant in British Navy custody; family pleads for help.

रामनगर। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद अंतर्गत रामनगर के रहने वाले और अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाज के जांबाज कप्तान अजय पंत इन दिनों एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी और कूटनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी ने उन पर रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। कैप्टन अजय पंत उस विशाल तेल टैंकर (ऑयल टैंकर) की कमान संभाल रहे थे, जिसे हाल ही में इंग्लिश चैनल में ब्रिटिश रॉयल मरीन कमांडोज ने एक बेहद गोपनीय और सनसनीखेज सैन्य ऑपरेशन के जरिए अपने कब्जे में लिया था। इस घटना के बाद से कैप्टन पंत के घर में कोहराम मचा हुआ है और उनके परिवार ने भारत सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर कानूनी सहायता मुहैया कराने की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार, 38 वर्षीय कैप्टन अजय पंत 'एमवी स्मिर्टोस' नामक विशाल तेल टैंकर के मास्टर (कप्तान) थे। यह जहाज बीती 4 जून को रूस के उस्त-लूगा टर्मिनल से लगभग 1,01,400 टन उराल क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) लेकर भारत के गुजरात स्थित सिक्का पोर्ट (जामनगर) की ओर रवाना हुआ था। 14 जून को जब यह जहाज इंग्लिश चैनल से गुजर रहा था, तभी ब्रिटिश रॉयल मरीन कमांडोज ने आसमान से हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज के डेक पर उतरकर उसे चारों तरफ से घेर लिया और अपने नियंत्रण में ले लिया। ब्रिटेन का आरोप है कि यह जहाज रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त बेड़े) का हिस्सा था, जो प्रतिबंधों को दरकिनार कर रूसी तेल का परिवहन कर रहा था। कैप्टन अजय पंत पर 'रूस (सैंक्शंस) रेगुलेशंस 2019' के नियम 46Z9B के तहत प्रतिबंधित रूसी तेल की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आपूर्ति में भूमिका निभाने का मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद कैप्टन अजय पंत को साउथेम्प्टन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को 'बोर्नमाउथ क्राउन कोर्ट' में होनी तय हुई है। ब्रिटिश कानून के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, यदि कैप्टन पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो उन्हें अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल की सजा काटनी पड़ सकती है। इस संकट की घड़ी में कैप्टन अजय पंत की पत्नी ऋतु पंत ने सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने अत्यंत भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा "मेरे पति पिछले 15 वर्षों से मर्चेंट नेवी में पूरी ईमानदारी से देश और अपनी सेवा दे रहे हैं। उनका आज तक का रिकॉर्ड बेदाग रहा है। एक नाविक (सेलर) के तौर पर वे केवल अपनी शिपिंग कंपनी के नेविगेशन निर्देशों का पालन कर रहे थे, उनका किसी भी राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध से कोई व्यक्तिगत लेना-देना नहीं है। अजय के पिता बुजुर्ग हैं, और मैं अकेले ही इस कानूनी लड़ाई को लड़ रही हूं।" ऋतु पंत ने आगे लिखा कि हर हिरासत में लिए गए नाविक के पीछे एक परिवार होता है जो चुपचाप तड़पता है। बच्चे अपने पिता का और बूढ़े मां-बाप अपने बेटे का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों से सम्मानपूर्वक अनुरोध किया है कि वे बिना किसी देरी के इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा कराएं और उनके पति की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित करें। जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया के माध्यम से उत्तराखंड पहुंचा, वैसे ही राज्य सरकार और प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। स्थानीय प्रशासन पीड़ित परिवार के संपर्क में है और केंद्र सरकार के माध्यम से ब्रिटिश दूतावास से संपर्क साधने की कवायद शुरू कर दी गई है ताकि कैप्टन अजय पंत को जल्द से जल्द राजनयिक और कानूनी मदद पहुंचाई जा सके।


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