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फायर सीजन खत्म होने से पहले उत्तराखंड के जंगल धधके: 394 से ज्यादा वनाग्नि घटनाओं में 331 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित! कई वन प्रभाग बेहद संवेदनशील श्रेणी में पहुंचे

editor
  • Awaaz Desk
  • May 27, 2026 10:05 AM
Uttarakhand's forests blaze before the fire season ends: Over 394 forest fires have affected 331 hectares! Several forest divisions have been placed in the highly sensitive category.

देहरादून। उत्तराखंड में जंगलों की आग लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। फायर सीजन अभी समाप्त भी नहीं हुआ है और प्रदेश में अब तक 331 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र आग की चपेट में आकर प्रभावित हो चुका है। हालात ऐसे हैं कि कई वन प्रभाग बेहद संवेदनशील श्रेणी में पहुंच गए हैं। बढ़ती गर्मी, सूखे मौसम और बारिश की कमी के चलते वन विभाग की चिंता लगातार बढ़ रही है और विभाग अब आग पर नियंत्रण के लिए मौसम के बदलने तथा बारिश का इंतजार कर रहा है। प्रदेश में इस वर्ष वनाग्नि की घटनाओं ने गढ़वाल मंडल में सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गढ़वाल रीजन में अब तक 285 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 241 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। आग की वजह से चीड़, बांज और मिश्रित वन क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों में जंगलों की निचली वनस्पतियां पूरी तरह जल चुकी हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं कुमाऊं रीजन में तुलनात्मक रूप से आग की घटनाएं कम सामने आई हैं, लेकिन यहां भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। कुमाऊं क्षेत्र में अब तक 74 वनाग्नि की घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं, जिनमें करीब 64 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ते तापमान और सूखे मौसम के कारण आग फैलने का खतरा अभी भी बना हुआ है। वन्यजीव क्षेत्रों में भी वनाग्नि का असर गंभीर रूप से देखने को मिला है। प्रदेश के विभिन्न वन्यजीव क्षेत्रों में अब तक 35 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। जंगलों में लगी आग से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई स्थानों पर छोटे जीव-जंतु और पक्षियों के आवास नष्ट होने की भी आशंका जताई जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी फायर सीजन समाप्त होने में समय बाकी है और 15 जून तक खतरा बना रह सकता है। ऐसे में विभाग की टीमें लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए हुए हैं। विभाग द्वारा फायर वॉचर, स्थानीय ग्रामीणों और वन कर्मियों की मदद से आग पर नियंत्रण की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है।


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