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उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों का बदलेगा रूप: मिड-डे मील का होगा सोशल ऑडिट,रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ हर स्कूल में शुरू होगी वोकेशनल ट्रेनिंग

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 22, 2026 12:07 PM
Uttarakhand's government schools set for a transformation: Social audits of mid-day meals to be conducted, and vocational training to be introduced in every school alongside real-time monitoring.

उत्तराखंड के सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के पोषण और आधारभूत ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए धामी सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सुधारों की रूपरेखा तैयार की है। प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश जारी किए हैं कि 'प्रधानमंत्री पोषण (एमडीएम)' योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर स्कूल में 'सोशल ऑडिट' कराया जाएगा। इसके साथ ही, अब यदि किसी स्कूल में एक दिन भी मिड-डे मील नहीं बनता है, तो इसकी रियल-टाइम जानकारी तुरंत राज्य स्तर तक पहुँचेगी।

उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील (प्रधानमंत्री पोषण योजना) की गुणवत्ता, पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में मिड डे मील का सोशल ऑडिट कराया जाएगा और इसके साथ ही रियल टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म विकसित किया जाएगा, ताकि किसी भी स्कूल में भोजन न बनने या वितरण में गड़बड़ी होने की जानकारी तत्काल मिल सके और तुरंत कार्रवाई की जा सके। शिक्षा विभाग के तहत संचालित प्रधानमंत्री पोषण (एमडीएम) और समग्र शिक्षा अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह तथा गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सुरक्षित विद्यालयी वातावरण को समान महत्व देना होगा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यालय में मिड डे मील का सोशल ऑडिट नियमित रूप से कराया जाए, जिससे भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, समय पर वितरण और पोषण मानकों का स्वतंत्र मूल्यांकन हो सके। साथ ही एक रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे यह तुरंत पता चल सके कि किसी दिन किसी विद्यालय में भोजन क्यों नहीं बना या वितरण में क्या समस्या आई। उन्होंने कहा कि ऐसी सभी घटनाओं की रोजाना निगरानी राज्य स्तरीय विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से की जाए। इसकी रिपोर्ट तत्काल राज्य परियोजना निदेशक, संबंधित जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को भेजी जाए, ताकि बिना देरी के सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। यदि किसी विद्यालय में बार-बार भोजन नहीं बनने की शिकायत मिलती है तो उसके कारणों को रिकॉर्ड कर शासन स्तर पर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। बैठक में विद्यालयों में स्किल-बेस्ड और वोकेशनल एजुकेशन को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय उद्योगों और स्वरोजगार से जोड़ने वाली व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर तैयार हो सकें। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा कि विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और पोषण संबंधी निगरानी का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर नियमित मेडिकल चेकअप की व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। साथ ही खेलकूद, शारीरिक शिक्षा और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को भी विद्यालयी गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में बालिकाओं की सुरक्षा और सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए अलग, स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराए जाएं। केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित सफाई और रखरखाव के लिए भी प्रभावी व्यवस्था विकसित करने को कहा गया। विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य भी तय किया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन स्कूलों में अब तक बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं है, उनकी कारण सहित सूची तैयार कर शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि प्रदेश का कोई भी विद्यालय बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और कौशल विकास को एकीकृत कर ही विद्यार्थियों का समग्र विकास संभव है। इसी सोच के तहत अब उत्तराखंड के विद्यालयों में पारदर्शी मिड डे मील व्यवस्था, आधुनिक निगरानी प्रणाली और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के जरिए शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है।


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