दिल्ली के गड्ढे ने छीना उत्तराखंड का लाल! सीएम रेखा गुप्ता ने किया आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी का ऐलान
राजधानी दिल्ली की सड़कों पर पसरी अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में सड़क पर बने गहरे और असुरक्षित गड्ढे के कारण उत्तराखंड के एक होनहार युवक, कमल की हुई दर्दनाक मौत ने इस घटना ने जहां पूरी दिल्ली में गुस्से की लहर पैदा कर दी है, वहीं सरकार की घेराबंदी भी शुरू हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए भारी आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिया है।
हादसे की सूचना मिलते ही उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल बलूनी सक्रिय हो गए। उन्होंने तत्काल इस मुद्दे को दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया। बलूनी ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का संकल्प लिया। उनकी पहल और कड़े रुख के बाद ही दिल्ली सरकार बैकफुट पर आई सांसद बलूनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था द्वारा की गई हत्या है। उनकी मध्यस्थता के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सहायता पैकेज की घोषणा की। 25 वर्षीय कमल मूल रूप से उत्तराखंड का निवासी था और दिल्ली में रहकर एक निजी कंपनी में कार्यरत था। घटना की रात वह अपने कार्यस्थल से घर लौट रहा था। जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के पास जल बोर्ड के कार्य के लिए खोदे गए एक गहरे गड्ढे में उसकी बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि गड्ढे के चारों ओर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग थी और न ही रात के समय कोई चेतावनी संकेत (रिफ्लेक्टर) लगाए गए थे। काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला गया,लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। इस घटना पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी है। हमने परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा देने और मृतक के एक परिजन को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। दिल्ली सरकार के जलमंत्री ने दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि जिस भी ठेकेदार या अधिकारी की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद दिल्ली में रह रहे उत्तराखंडी समाज और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पूरी दिल्ली में विकास कार्यों के नाम पर जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, जो अब 'मौत का जाल' बन चुकी हैं। प्रवासी संगठनों ने मांग की है कि केवल मुआवजे से काम नहीं चलेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए।