• Home
  • News
  • Vigilance officers who arrived in Sitarganj to accept a bribe faced a backlash; they were held hostage overnight, and operations at the Tehsil office remained stalled for 20 hours.

सितारगंज में रिश्वत लेने आए विजिलेंस अफसरों पर भारी पड़ा एक्शन,रात भर बने रहे बंधक, 20 घंटे ठप रहा तहसील का कामकाज

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 30, 2026 12:07 PM
Vigilance officers who arrived in Sitarganj to accept a bribe faced a backlash; they were held hostage overnight, and operations at the Tehsil office remained stalled for 20 hours.

खटीमा। उत्तराखंड के सितारगंज तहसील परिसर में उस वक्त अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई, जब 14 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में कार्रवाई करने पहुंची विजिलेंस (सतर्कता) टीम खुद ही वहां घिर गई। विजिलेंस की इस कार्रवाई को गलत और एकतरफा बताते हुए आक्रोशित राजस्व कर्मियों ने तहसील के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। कर्मचारियों के इस तीखे विरोध के चलते विजिलेंस टीम के सदस्य पूरी रात तहसील परिसर के भीतर ही कैद (बंधक) बने रहे।

ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज तहसील में रिश्वतखोरी के एक मामले ने ऐसा मोड़ लिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई विजिलेंस की कार्रवाई ही बड़े विवाद में बदल गई। 14 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में दो राजस्व कर्मियों की गिरफ्तारी के विरोध में तहसील कर्मचारियों ने जोरदार आंदोलन छेड़ दिया। कर्मचारियों ने तहसील के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया, जिससे विजिलेंस की टीम पूरी रात तहसील परिसर के भीतर ही फंसी रही। करीब 20 घंटे तक तहसील का पूरा कामकाज ठप रहा और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मामला बुधवार, 29 जुलाई, का है, जब विजिलेंस टीम ने सितारगंज तहसील परिसर में छापेमारी कर वरिष्ठ सहायक और संग्रह अमीन को 14 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। कार्रवाई की खबर फैलते ही राजस्व विभाग के कर्मचारी बड़ी संख्या में एकत्र हो गए और विजिलेंस की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित कर्मचारियों ने तत्काल प्रभाव से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने तहसील कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया, जिसके कारण विजिलेंस टीम रातभर परिसर के अंदर ही फंसी रही। यह घटनाक्रम पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासनिक संकट भी खड़ा हो गया। धरना और तालाबंदी के कारण तहसील का पूरा कामकाज ठप हो गया। नामांतरण, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल, भूमि अभिलेखों से जुड़े कार्य सहित सभी राजस्व सेवाएं प्रभावित रहीं। दूर-दराज के गांवों से अपने जरूरी दस्तावेज बनवाने पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन कोई काम नहीं हो सका। आखिरकार उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देर रात से लेकर गुरुवार तक प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। लंबे मंथन के बाद उच्च अधिकारियों के स्तर पर सहमति बनी, जिसके बाद गतिरोध समाप्त हुआ। समझौते के बाद कर्मचारियों ने अपना धरना और कार्य बहिष्कार समाप्त करने की घोषणा की। इसके साथ ही तहसील के मुख्य गेट पर लगाया गया ताला खोल दिया गया और सभी अधिकारी-कर्मचारी अपने-अपने कार्यालयों में लौटकर नियमित कार्य में जुट गए। करीब 20 घंटे बाद तहसील की सेवाएं फिर से बहाल हो सकीं, जिससे आम लोगों ने राहत की सांस ली। वार्ता के बाद विजिलेंस टीम ने गिरफ्तार किए गए दोनों कर्मचारियों को छोड़ दिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं तेज हैं। एक ओर जहां विजिलेंस की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम मानी जा रही थी, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों ने इसे विभागीय प्रक्रिया की अनदेखी बताते हुए विरोध दर्ज कराया। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई या इसी प्रकार की कार्रवाई की गई, तो वे फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, एसडीएम तुषार सैनी ने बताया कि सभी पक्षों से बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाल लिया गया है और अब तहसील में सामान्य व्यवस्था बहाल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जनता के हित सर्वोपरि हैं और यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी राजस्व सेवाएं पहले की तरह सुचारु रूप से संचालित हों। सितारगंज तहसील का यह पूरा घटनाक्रम अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। भ्रष्टाचार के आरोप, विजिलेंस की कार्रवाई, कर्मचारियों का विरोध, पूरी रात परिसर में फंसी टीम और 20 घंटे तक ठप रहा सरकारी कामकाज—इन सभी घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कार्यालयों में जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, आम लोगों की उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे विवादों का समाधान इस तरह निकाला जाए कि सरकारी सेवाएं बाधित न हों और जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े।


संबंधित आलेख: