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वायरल पड़तालः विवादित टिप्पणी, सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सोशल मीडिया पर घमासान! आखिर कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत? जिन्होंने लगाई नूपुर शर्मा को फटकार और क्यों गरमाई सियासत

editor
  • Awaaz24x7 Team
  • July 01, 2022 02:07 PM
Viral investigation: Controversial remarks, Supreme Court rebuke and ruckus on social media! After all, who is Justice Suryakant? Who reprimanded Nupur Sharma and why politics heats up

पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी से जुड़े मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने नुपूर शर्मा को कड़ी फटकार लगाते हुए देश से माफी मांगने को कहा। कोर्ट ने उदयपुर हत्याकाण्ड के लिए भी नूपुर शर्मा की टिप्पणी को जिम्मेदार टहराया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनके बयान से देश में हालात बिगड़े है उन्हें टीवी पर आकर देश से माफी मांगनी चाहिए। नूपुर शर्मा को कोर्ट की फटकार के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आने लगी। इस दौरान कुछ लोगों ने जहां कोर्ट की फटकार को सराहा, तो वहीं कुछ लोग फटकार को गलत बताते दिखे। 

इस बीच एक ऐसा मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें नूपुर शर्मा को फटकार लगाने वाले जज को ही लोगों ने कांग्रेस से जोड़ दिया। हांलाकि इस मैसेज में जो भी लिखा गया है वो शत-प्रतिशत झूठा है। इस मैसेज को लेकर भी सियासत गरमाने लगी है, लगातार लोग इसपर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। 

आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई दो जजों जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने की। खबरों के मुताबिक जब नूपुर शर्मा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नूपुर की जान को खतरा है तो जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें खतरा है या वो (नूपुर शर्मा) सुरक्षा के लिए खतरा बन गई हैं। उन्होंने जिस तरह पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है, देश में जो हो रहा है, उसके लिए वो अकेले जिम्मेदार हैं। नूपुर शर्मा को लगाई इस फटकार के बाद से जस्टिस सूर्यकांत का नाम हर किसी की जबान पर है।

तो आइए जानते हैं कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?
जस्टिस सूर्यकांत 24 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। इससे पहले वो हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं, वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के भी जज रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत को अक्टूबर, 2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया था। वे इस पद पर 5 अक्टूबर 2018 से 23 मई 2019 तक रहे। उससे पहले 9 जनवरी 2004 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का जज बनाया गया था। 
बता दें कि जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से लॉ में बैचलर्स की डिग्री 1984 में लेने के बाद उन्होंने हिसार के जिला अदालत में कानून की प्रैक्टिस शुरू की थी। 1985 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए चंडीगढ़ आए। 7 जुलाई 2000 को वे हरियाणा के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) नियुक्त होने वाले सबसे कम उम्र के वकील बने थे। मार्च 2001 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) बनाया गया था। जस्टिस सूर्यकांत को संविधान, सेवा संबंधी मामले और सिविल मामलों में माहिर बताया जाता है। 

पढ़ें जस्टिस सूर्यकांत के महत्वपूर्ण फैसले
सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत अनुच्छेद 370, सीएए और पेगासस सहित कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं। वे उस बेंच का भी हिस्सा थे, जिसने पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान हुई खामियों की सुनवाई की थी और जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। अपने एक फैसले में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अपनी सुरक्षा के लिए लाइसेंस प्राप्त बंदूकों का इस्तेमाल किसी जश्न की फायरिंग में नहीं होना चाहिए। इस पर रोक लगाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा था कोरोना महामारी के दौरान जस्टिस सूर्यकांत जेल में बंद कैदियों के बचाव में आए थे और उनकी रिहाई का आदेश दिया था ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।


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