उत्तराखंड में दलबदल का सिलसिला शुरू, 6 बड़े नेताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ, भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का तंज
देहरादून। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में छह बड़े नेताओं ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इनमें भाजपा के पूर्व विधायक और अन्य दलों के पूर्व नेता शामिल हैं। इस घटनाक्रम पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि “निष्कासित नेताओं को शामिल करना 2027 में कमल की हैट्रिक का संकेत है। दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होने वाले प्रमुख नेता हैं- रुद्रपुर के पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल, बसपा के पूर्व विधायक नारायण पाल, घनसाली से पूर्व विधायक भीमलाल आर्य, रुड़की के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गौरव गोयल, मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता और भीमताल से भाजपा नेता लाखन सिंह नेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जिन नेताओं को कांग्रेस आज शामिल कर रही है, उन्हें भाजपा बहुत पहले ही पार्टी से बाहर कर चुकी है। ऐसे लोग भाजपा का चेहरा कभी नहीं हो सकते।” भट्ट ने स्पष्ट किया कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और जो भी अनुशासन तोड़ता है, उसे पार्टी छोड़नी पड़ती है।भट्ट ने कांग्रेस को सलाह देते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले यह समझना चाहिए था कि इन नेताओं को भाजपा से क्यों निकाला गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस के पास खुद के उम्मीदवार तक नहीं बचे हैं, इसलिए अब भाजपा से निकाले गए लोगों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही है।” भट्ट ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी और जीत की हैट्रिक पूरी करेगी। मंत्रिमंडल विस्तार और दायित्वधारियों की नई सूची को लेकर उठ रही चर्चाओं पर महेंद्र भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों व्यस्त हैं। हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें उत्तराखंड आमंत्रित किया है। दिल्ली में अन्य महत्वपूर्ण बैठकों के बाद जैसे ही मुख्यमंत्री देहरादून लौटेंगे, नई सूची जल्द जारी कर दी जाएगी।भट्ट ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस अब मात्र चार नेताओं की पार्टी बनकर रह गई है। उनके प्रभारी को देवभूमि उत्तराखंड आने की जरूरत तक नहीं लगती। वे दिल्ली में बैठकर ही बैठकें करवा रहे हैं, जबकि भाजपा के कार्यकर्ता 24 घंटे जमीनी स्तर पर सक्रिय रहते हैं।भट्ट ने यह भी कहा कि भाजपा में शामिल होने वाला हर व्यक्ति पार्टी का कार्यकर्ता बन जाता है। उसे किसी अन्य दल के नजरिए से नहीं देखा जाता, बल्कि उसकी क्षमता और उपयोगिता के आधार पर जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इस घटनाक्रम से उत्तराखंड राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस इसे अपनी बढ़ती ताकत बता रही है, जबकि भाजपा इसे निष्कासित नेताओं का जमावड़ा करार दे रही है। 2027 के चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच अब जोर-आजमाई शुरू हो गई है।