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पश्चिम एशिया संकट 'कोरोना' जैसा वैश्विक खतरा: पीएम मोदी ने देशवासियों से एकजुटता की की अपील,ऊर्जा सुरक्षा और भारतीयों की जान पर जोर

editor
  • Tapas Vishwas
  • March 23, 2026 01:03 PM
West Asia crisis a global threat like COVID-19: PM Modi appeals for solidarity, stresses energy security and the lives of Indians

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को 'कोरोना महामारी' जैसा अप्रत्याशित और लंबे समय तक प्रभाव डालने वाला वैश्विक संकट करार दिया। उन्होंने देशवासियों से धैर्य, संयम और एकजुटता के साथ इस चुनौती का सामना करने की अपील की, ठीक वैसे ही जैसे कोरोना काल में पूरा देश एक साथ खड़ा हुआ था। पीएम मोदी ने सोमवार को संसद में दिए विशेष संबोधन में युद्ध के आर्थिक, ऊर्जा, सुरक्षा और मानवीय प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा सरकार की तैयारियों और कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया का यह क्षेत्र भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की बड़ी आपूर्ति होती है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर रुकावट और हमलों की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत ऊर्जा आयात इसी क्षेत्र से करता है। युद्ध के तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है और इसका प्रभाव जनजीवन, अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा आपूर्ति पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मोदी ने जोर देकर कहा कि होर्मुज में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमला अस्वीकार्य है। भारत कूटनीति के माध्यम से भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयासरत है। पीएम ने खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध क्षेत्र में भारतीय जहाजों के चालक दल में भारतीयों की संख्या अधिक है, इसलिए चिंता स्वाभाविक है। संकट शुरू होने के बाद उन्होंने स्वयं क्षेत्र के अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों से दो-दो बार फोन पर बात की और भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन प्राप्त किया। दुर्भाग्य से कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई और कुछ घायल हुए, लेकिन भारतीय मिशन निरंतर मदद में जुटे हैं। अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से करीब 1,000 लोग शामिल हैं जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र हैं। सीबीएसई खाड़ी देशों में भारतीय बच्चों की पढ़ाई निर्बाध रखने के लिए उचित कदम उठा रही है।

ऊर्जा सुरक्षा पर मोदी ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में सरकार ने कच्चे तेल के रणनीतिक भंडारण को प्राथमिकता दी, जिससे आज 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडार उपलब्ध है और 65 लाख टन पर काम चल रहा है। इथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग में की गई तैयारी भी उपयोगी साबित हो रही है। रेलवे के बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण से हर साल 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है। मेट्रो नेटवर्क के 1100 किलोमीटर विस्तार, 15,000 इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयास भविष्य को सुरक्षित बना रहे हैं। परमाणु ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों पर युद्ध के असर को रोकने के लिए सरकार पिछले दशक से सक्रिय है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए और डीएपी, एनपीके जैसी खादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया। कोरोना काल में भी वैश्विक संकट का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया गया जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया का बैग 3000 रुपये पहुंचा, तब भारत में 300 रुपये से कम में उपलब्ध कराया गया। पीएम ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी। खरीफ बुवाई सुचारू रूप से हो, इस पर फोकस है और खाद्यान्न भंडार पर्याप्त हैं। गर्मियों में बिजली मांग बढ़ने की चुनौती को देखते हुए कोयला भंडार पर्याप्त हैं और नवीकरणीय ऊर्जा ने तैयारियों में सहायता की है। अंतर-मंत्रालयी समूह रोज बैठक कर आयात-निर्यात की दिक्कतों का समाधान कर रहा है। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए राज्य सरकारों से सतर्कता बरतने का आह्वान किया गया। तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा मजबूत की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कूटनीति पर भारत की स्पष्ट भूमिका दोहराई। भारत ने संघर्ष की शुरुआत से गहरी चिंता जताई, तनाव कम करने और बातचीत से समाधान का आग्रह किया। युद्ध किसी के हित में नहीं, मानवता के लिए हानिकारक है। भारत सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। संसद से एकमत संदेश दुनिया तक पहुंचना चाहिए। अंत में मोदी ने कहा कि चुनौतियां लंबी चल सकती हैं, लेकिन एकजुटता, धैर्य और संयम से हम हर मुश्किल का सामना कर सकते हैं। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़कर भारत ने साबित किया कि एकजुट होकर हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं। अब फिर वही एकता और सतर्कता की जरूरत है।
 


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