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नतीजों के बाद सुलगता पश्चिम बंगाल: दफ्तरों पर हमले, मूर्तियों पर प्रहार और सड़कों पर हिंसा, तीन मौतों ने बढ़ाई चिंता, सियासी आरोप-प्रत्यारोप चरम पर

editor
  • Awaaz Desk
  • May 06, 2026 06:05 AM
West Bengal simmers after the results: Offices attacked, statues vandalized, and street violence. Three deaths raise concerns, and political accusations and counter-accusations are rife.

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद राज्य के कई हिस्सों में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। अलग-अलग जिलों से लगातार आ रही घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक इन घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई जगहों पर राजनीतिक दलों के दफ्तरों और संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के कोर्ट मोड़ पर तृणमूल कांग्रेस के एक पार्टी कार्यालय में देर रात आग लगा दी गई। यह कार्यालय वार्ड नंबर 53 की पार्षद मौसमी बोस का बताया जा रहा है। आग इतनी भीषण थी कि पूरा दफ्तर जलकर राख हो गया और बगल की एक दुकान को भी भारी नुकसान पहुंचा। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। स्थानीय बीजेपी विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और दमकल विभाग को तुरंत सूचित करने की बात कही है। उन्होंने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की मांग की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात दोहराई है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार घटना ने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है। एक दुकानदार हरेकृष्ण बनर्जी ने बताया कि दुकान बंद करने के कुछ देर बाद उन्हें आग लगने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि आग तेजी से फैल रही थी और उनकी दुकान का बिजली सिस्टम भी इसकी चपेट में आ गया। इसी बीच मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज में एक और विवादित घटना सामने आई, जहां दशकों पुरानी लेनिन की प्रतिमा को तोड़ दिया गया। इस घटना ने राजनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने इस प्रतिमा को गिराया, जबकि बीजेपी ने इन आरोपों से साफ इनकार करते हुए इसे अराजक तत्वों की हरकत बताया है।

नदिया जिले में भी सियासी तनाव देखने को मिला, जहां कांग्रेस ने एक टीएमसी कार्यालय पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस का दावा है कि यह कार्यालय पहले उनका था, जिसे तृणमूल कांग्रेस ने कब्जा कर लिया था। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। हिंसा की इन घटनाओं के बीच तीन लोगों की मौत ने हालात को और गंभीर बना दिया है। कोलकाता के बेलेघाटा में तृणमूल कार्यकर्ता विश्वजीत पटनायक की हत्या के बाद बीरभूम के नानूर और उत्तर 24 परगना के न्यू टाउन में भी दो और मौतों की खबर सामने आई। हालांकि इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस के अनुसार कुछ मामलों में आपसी गुटबाजी और विवाद भी वजह हो सकते हैं। कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में भी हालात तब बिगड़ गए जब बुलडोजरों के साथ पहुंचे एक समूह ने तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यालय को निशाना बनाया और उसे ध्वस्त कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। इन घटनाओं के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जिलों में पुलिस और केंद्रीय बलों को लगातार गश्त करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।


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