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ये कैसी लापरवाहीः डेंगू के मरीज को प्लाज्मा की जगह चढ़ा दिया मौसमी का जूस! मरीज की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, जांच होने तक अस्पताल सील

editor
  • Awaaz24x7 Team
  • October 21, 2022 06:10 AM
What kind of negligence: Dengue patient was offered seasonal juice instead of plasma! After the death of the patient, the commotion of the relatives, the hospital sealed till the investigation is done

लखनऊ। यूपी के प्रयागराज से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी। प्रयागराज में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते एक डेंगू मरीज की मौत हो गई। मामला 19 अक्टूबर का बताया जा रहा है जो अब मीडिया पर सुर्खियां बना हुआ है। यहां एक निजी अस्पताल में एक 32 वर्षीय डेंगू मरीज की मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके मरीज की मौत प्लाजमा या प्लेटलेट्स की बजाए मौसमी के रस का इंजेक्शन लगाने की वजह से हुई है। वहीं इस मामले पर जब प्रयागराज के सीएमओ नानक सरन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया गया है। सीएमओ नानक सरन ने आगे बताया कि जांच जारी है, मृतक के परिवार ने कुछ आरोप लगाए हैं। मरीज को तीन यूनिट प्लेटलेट्स दिए जाने तक कोई समस्या नहीं थी। फिर उन्होंने अस्पताल में किसी के माध्यम से कुछ प्लेटलेट यूनिट मंगवाई, जिसके बाद मरीज की हालत बिगड़ गई। अगले दिन रोगी की मृत्यु हो गई। सीएमओ ने आगे कहा कि परिवार के पास अभी भी चढ़ाई गई प्लेटलेट्स की एक यूनिट बची है। प्लेटलेट्स की आखिरी यूनिट जो परिवार के पास है उसकी जांच की जाएगी। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए गुरुवार शाम अस्पताल को सील कर दिया गया था। ये जांच खत्म होने तक सील रहेगा।” प्रयागराज के एसएसपी शैलेश पांडे ने कहा कि हम ब्लड और प्लेटलेट्स की अवैध आपूर्ति में शामिल गिरोहों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले हमने ब्लड और प्लेटलेट्स की अवैध आपूर्ति के आरोप में 12 लोगों को जेल भेजा था। मृतक प्रदीप पांडे के साले सौरभ त्रिपाठी ने बताया कि 14 अक्टूबर को उनकी तबीयत खराब हो गई और उन्हें प्रयागराज के पीपलगांव इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परीक्षण के बाद हमें बताया गया कि उन्हें डेंगू है। 16 अक्टूबर को हमें बताया गया कि उन्हें आठ यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत है। हम परिवार के भीतर से तीन इकाइयों की व्यवस्था करने में कामयाब रहे।”


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