भगवा सुनामी में उड़ेगा टीएमसी का गढ़? यूपी-एमपी के बाद अब बंगाल में कमल खिलने के संकेत,विपक्ष में खलबली
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के मानचित्र पर भारतीय जनता पार्टी का 'एकक्षत्र राज' और अधिक गहराता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों को अपना अभेद्य किला बनाने के बाद अब भाजपा की नजरें पश्चिम बंगाल के 'लाल गलियारे' और टीएमसी के 'किले' पर टिकी हैं। 4 मई को आने वाले पांच राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी) के नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए आए 6 प्रमुख एग्जिट पोल में से 4 सीधे तौर पर भाजपा की सरकार बनते दिखा रहे हैं। वहीं, केवल 2 एग्जिट पोल ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में हैं। यदि ये नतीजे हकीकत में बदलते हैं, तो यह भारतीय राजनीति का इस दशक का सबसे बड़ा घटनाक्रम होगा। जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा बंगाल जीतती है और असम में सत्ता बरकरार रखती है, तो पूर्वी भारत में उसकी ताकत असीमित हो जाएगी।
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि देश का एक बड़ा हिस्सा भगवा रंग में रंग चुका है। मई 2026 तक, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 पर सत्तासीन है। भाजपा अब केवल चुनाव नहीं लड़ती, बल्कि वह मुकाबले की दिशा तय करती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हरियाणा जैसे राज्यों में भाजपा की सफलता के पीछे दो मुख्य स्तंभ हैं 'प्रखर हिंदुत्व' और 'जनकल्याणकारी योजनाएं'। केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाएं सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों और घरों तक पहुँच रही हैं, जिसने मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को पार्टी के प्रति 'वफादार' बना दिया है। यही कारण है कि ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रीय दलों के गढ़ों में भी भाजपा ने पिछले 12 वर्षों में समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। बंगाल में संभावित हार के डर और भाजपा के अखिल भारतीय विस्तार ने विपक्षी गठबंधन को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। अगर 4 मई को बंगाल में सत्ता परिवर्तन होता है, तो यह न केवल ममता बनर्जी के लिए बड़ा निजी झटका होगा, बल्कि 2029 की राष्ट्रीय राजनीति की धुरी भी बदल देगा। अब सबकी निगाहें स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और 4 मई की सुबह होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।