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पटना में महिलाओं की 'आक्रोश रैली', बिहार की सड़कों पर दिल्ली की सियासी जंग, जमकर गरजे सीएम सम्राट चौधरी 

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 21, 2026 07:04 AM
Women's 'Anger Rally' in Patna: Delhi's Political Battle Hits the Streets of Bihar; CM Samrat Chaudhary Roars Loudly

पटना। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर बढ़ती राजनीतिक खींचतान और लोकसभा में बिल पारित नहीं हो पाने के बाद महिलाओं में उभर रहा असंतोष अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में बिहार की राजधानी पटना में एनडीए महिला कार्यकर्ताओं द्वारा ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ और आक्रोश मार्च का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों महिलाओं ने भाग लेकर अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और अधिकारों की मांग को बुलंद किया।

गांधी मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल पर जुटी महिलाओं की बड़ी संख्या ने इस आयोजन को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। सम्मेलन में शामिल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिलाओं के आक्रोश को जायज ठहराते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार की अन्यायपूर्ण घटना होने पर दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें “पाताल से भी ढूंढकर” सख्त सजा दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए गंभीर है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस दौरान सम्मेलन में शामिल महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को अब महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस निर्णय लेने होंगे। कार्यक्रम में बीजेपी और एनडीए से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद रहे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि यह मुद्दा अब जनआंदोलन का रूप ले सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मेलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और भागीदारी का प्रतीक है। महिलाओं ने जिस तरह संगठित होकर अपनी आवाज उठाई है, वह आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव डाल सकता है। इस आयोजन के जरिए एक ओर जहां महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए मजबूत संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर सरकार ने भी यह स्पष्ट किया कि वह महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है। अब यह देखना अहम होगा कि महिला आरक्षण और प्रतिनिधित्व का यह मुद्दा आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका राजनीतिक परिदृश्य पर कितना असर पड़ता है।
 


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