भीमताल में 'महिला सशक्तीकरण' पर फिरा पानी: एक साल खड़ी रहकर वापस लौटी ई-रिक्शा, पालिका प्रशासन पर दोहरी नीति का आरोप
भीमताल। उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भीमताल में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की एक महत्वाकांक्षी पहल स्थानीय प्रशासनिक अड़चनों और नीतिगत गतिरोध की भेंट चढ़ गई। करीब एक साल पहले महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से लाई गई ई-रिक्शा सेवा आज तक शुरू नहीं हो सकी। महीनों तक अनुमति के इंतजार में ई-रिक्शा धूल फांकती रही और आखिरकार निराश होकर महिला स्वयं सहायता समूह को इसे वापस हल्द्वानी भेजने पर मजबूर होना पड़ा है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में महिला सशक्तीकरण के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर कर दिया है।
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लाई गई ई-रिक्शा सेवा करीब एक साल बाद भी जमीन पर नहीं उतर सकी। नगर पालिका से संचालन की अनुमति नहीं मिलने के कारण महिला सहायता समूह अब ई-रिक्शा को भीमताल से वापस हल्द्वानी भेजने की तैयारी में है। लंबे समय तक अनुमति का इंतजार करने के बाद सेवा शुरू नहीं हो पाने से महिला समूह में नाराजगी है। समूह ने नगर पालिका प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। महिला सहायता समूह के मुताबिक, स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ई-रिक्शा भीमताल लाया गया था। योजना के तहत महिलाओं को इसके संचालन से जोड़कर आय का साधन उपलब्ध कराने की तैयारी थी। लेकिन ई-रिक्शा पहुंचने के बाद संचालन की अनुमति नहीं मिल सकी। देखते ही देखते करीब एक साल बीत गया और सेवा शुरू नहीं हो पाई। अब स्थिति यह है कि लंबे समय से खड़े ई-रिक्शा को वापस हल्द्वानी भेजने का फैसला लेना पड़ रहा है। महिला सहायता समूह की अध्यक्ष रेखा कुलियाल ने पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की गई थी तो संचालन की अनुमति देने से पहले ही नियम और शर्तें स्पष्ट की जानी चाहिए थीं। उनका कहना है कि यदि ई-रिक्शा संचालन को लेकर कोई आपत्ति या यातायात संबंधी समस्या थी, तो समूह को समय रहते इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। महिला समूह का तर्क है कि एक साल तक ई-रिक्शा को खड़ा रखने के बाद अब उसे वापस भेजना उन महिलाओं के लिए निराशाजनक है, जो इस सेवा के माध्यम से रोजगार से जुड़ने की उम्मीद कर रही थीं। समूह ने पालिका के निर्णय को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजनाओं और स्थानीय स्तर पर उनके संचालन के लिए उपलब्ध अवसरों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष सीमा टम्टा का कहना है कि भीमताल में सड़कें पहले से ही संकरी और व्यस्त हैं। पर्यटन सीजन के दौरान बाहरी वाहनों की संख्या बढ़ने से कई बार यातायात का दबाव बढ़ जाता है और जाम की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में ई-रिक्शा के संचालन से यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। पालिका अध्यक्ष के मुताबिक, इसी यातायात स्थिति को ध्यान में रखते हुए बोर्ड स्तर पर ई-रिक्शा संचालन को लेकर निर्णय लिया गया है। पालिका का पक्ष है कि शहर में यातायात सुचारु बनाए रखना भी जरूरी है और किसी ऐसी व्यवस्था की अनुमति नहीं दी जा सकती जिससे पर्यटन सीजन में जाम की समस्या और बढ़े। ई-रिक्शा सेवा का मामला अब केवल अनुमति का विषय नहीं रह गया है। इसके साथ महिलाओं के स्वरोजगार और शहर की यातायात व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल भी जुड़ गया है। एक ओर महिला समूह रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने की बात कर रहा है, वहीं पालिका यातायात दबाव को लेकर अपनी चिंता जता रही है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि महिला समूह और पालिका प्रशासन के बीच संवाद के जरिए कोई व्यावहारिक रास्ता निकाला जाए। निर्धारित रूट, समय और संचालन के नियम तय कर सेवा को यातायात व्यवस्था के अनुरूप चलाने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल करीब एक साल से खड़ा ई-रिक्शा वापस हल्द्वानी भेजे जाने की तैयारी में है और महिलाओं की स्वरोजगार पहल के सामने अनुमति का सवाल जस का तस बना हुआ है।