महिला आरक्षण और परिसीमन: अमित शाह का विपक्ष पर तीखा प्रहार, बोले-परिसीमन का विरोध मतलब एसी-एसटी की सीटों में वृद्धि का विरोध
नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर चल रही ऐतिहासिक बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सभी सवालों का आक्रामक और तथ्यात्मक जवाब दिया। शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और परिसीमन की प्रक्रिया किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जो लोग आज परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे अनजाने में या जानबूझकर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटों में होने वाली बढ़ोत्तरी का ही रास्ता रोक रहे हैं।
क्षेत्रीय असंतुलन और दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों में कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए गृह मंत्री ने गणितीय आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल की वर्तमान में 129 सीटें (23.76%) हैं। परिसीमन के बाद जब कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 होंगी, तब इन पांच राज्यों की सीटें बढ़कर 195 हो जाएंगी, जो कुल सदन का 23.87% होंगी। शाह ने जोर देकर कहा, "किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि हर राज्य के प्रतिनिधित्व में 50% की वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है। अमित शाह ने देश के मन में व्याप्त भ्रम को दूर करते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल ने साल 2026 की जनगणना के साथ ही जाति आधारित जनगणना कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देश को 'उत्तर-दक्षिण' या 'पूर्व-पश्चिम' की सीमाओं में नहीं बांटना चाहिए, बल्कि एक समग्र भारत के विजन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।इतिहास का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ही हमेशा परिसीमन के खिलाफ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन के जरिए परिसीमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने कल भी जनता को उनके अधिकारों से वंचित किया और आज भी वही करने की कोशिश कर रही है।" शाह ने आश्वासन दिया कि परिसीमन के बाद हर निर्वाचन क्षेत्र में 'हर वोट का मूल्य समान' होगा। इस विधेयक की महत्ता बताते हुए शाह ने जानकारी दी कि चर्चा में कुल 133 सदस्यों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 56 महिलाएं थीं। उन्होंने इसे एक लोकतांत्रिक रिकॉर्ड करार दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि हालांकि किसी ने खुले तौर पर महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया, लेकिन विपक्षी गठबंधन के सदस्यों ने 'अगर-मगर' के बहाने इस राह में रोड़े अटकाने की कोशिश की है।