केदारनाथ पैदल मार्ग पर 'मिशन मोड' में काम: 80 प्रतिशत बर्फ साफ, ग्लेशियरों के साये में सुरक्षा बलों की निगरानी में जुटे श्रमिक
रुद्रप्रयाग। बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने में अब चंद दिन ही शेष हैं, जिसे देखते हुए गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक के 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर युद्धस्तर पर कार्य जारी है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग की टीमें बेमौसमी बर्फबारी की चुनौतियों को मात देते हुए पुनर्निर्माण और सफाई कार्यों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। अब तक पैदल मार्ग से करीब 80 प्रतिशत बर्फ हटाई जा चुकी है।
इस बार केदारनाथ मार्ग पर थारू, लिनचोली, हथनी, भैरव और कुबेर जैसे संवेदनशील ग्लेशियरों पर 5 से 6 फीट तक बर्फ जमा थी। लोनिवि के अधिशासी अभियंता राजबिंद सिंह ने बताया कि धूप खिलने के साथ ही ऊपर से ग्लेशियर टूटने (एवलांच) का खतरा बना रहता है। यात्रियों और श्रमिकों की सुरक्षा को देखते हुए, हर पल सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच श्रमिक बर्फ हटाने का जोखिम भरा काम कर रहे हैं। वर्तमान में गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच मार्ग आवाजाही के लिए खुल चुका है। आगामी 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। समय कम होने के कारण डीडीएमए गुप्तकाशी के कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं। पैदल मार्ग पर रेलिंग की मरम्मत, रैन शेल्टर (Rain Shelter) का नवीनीकरण और डेंट-पेंट जैसे सौंदर्यकरण के कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि कपाट खुलने से कम से कम तीन दिन पहले पूरे मार्ग को चकाचक कर दिया जाए। अधिकारियों के अनुसार, इस साल बार-बार हो रही बेमौसमी बर्फबारी ने विभाग की कार्ययोजना में बाधा डाली है। कई बार बर्फ हटाने के बाद दोबारा हिमपात होने से काम को नए सिरे से शुरू करना पड़ा। इसके बावजूद, विभाग की टीम पूरे मनोयोग से जुटी है ताकि देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। चूंकि ग्लेशियर पॉइंट पर बर्फ अभी भी मौजूद है, इसलिए प्रशासन ने यात्रा शुरू होने पर यात्रियों से सावधानी बरतने और मौसम विभाग की चेतावनी का पालन करने की अपील की है। फिलहाल, केदारपुरी में रौनक लौटने लगी है और पुनर्निर्माण कार्य अपने निर्णायक चरण में पहुँच गए हैं।