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उत्तराखण्ड NEET काउंसलिंग पर यशपाल आर्य ने सरकार को घेरा! आरक्षित श्रेणी में सीट आवंटन को लेकर शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग

editor
  • Awaaz Desk
  • September 30, 2026 09:09 AM
Yashpal Arya targets the government over Uttarakhand NEET counseling; demands an impartial inquiry into complaints regarding seat allocation in the reserved category.

हल्द्वानी/देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखंड में NEET-UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया में आरक्षित वर्गों की सीटों के आवंटन को लेकर सामने आई शिकायतों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, EWS तथा अन्य आरक्षित श्रेणियों का लाभ ऐसे अभ्यर्थियों को मिला है जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते, तो यह उत्तराखंड के वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के साथ गंभीर अन्याय है। ऐसे मामलों में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति नहीं की जानी चाहिए, बल्कि पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

यशपाल आर्य ने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय (HNBUMU) देहरादून द्वारा संचालित NEET-UG काउंसलिंग की प्रथम चरण की सूची को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायत के अनुसार प्रथम चरण की सूची में क्रम संख्या 684 पर दिपांशु और 745 पर कुसुम मल को अनुसूचित जाति श्रेणी के अंतर्गत सीट आवंटित किए जाने का उल्लेख है, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार दोनों सामान्य श्रेणी से संबंधित हैं। इसी प्रकार क्रम संख्या 820 पर प्रियांशु गुप्ता तथा 825 पर हर्षित को अनुसूचित जाति श्रेणी की सीट आवंटित किए जाने का उल्लेख है, जबकि उपलब्ध शिकायत के अनुसार दोनों OBC श्रेणी से संबंधित हैं। वहीं क्रम संख्या 951 पर चित्रा, जिन्हें सामान्य-EWS श्रेणी का बताया गया है, को भी अनुसूचित जाति श्रेणी की सीट आवंटित किए जाने का आरोप है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इन पांचों मामलों सहित ऐसे सभी मामलों की जांच आवश्यक है। किसी अभ्यर्थी को गलत तरीके से आरक्षित श्रेणी का लाभ मिला है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण सक्षम सरकारी प्राधिकरण द्वारा मूल जाति प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र तथा संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही किया जाना चाहिए।
यशपाल आर्य ने कहा कि हाल ही में राउंड-1 और राउंड-2 के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के प्रवेश/फ्लोट स्थिति की प्रोविजनल सूची जारी हुई है और श्रेणी एवं डोमिसाइल से जुड़े प्रमाणपत्रों के सत्यापन की आवश्यकता भी सामने आई है। ⁠उन्होंने कहा कि यदि गुजरात, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार अथवा अन्य राज्यों से आए अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड की आरक्षित सीटों का लाभ लिया है, तो किसी भी अभ्यर्थी को केवल उसके राज्य से बाहर का होने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन जिस अभ्यर्थी ने उत्तराखंड के आरक्षण अथवा डोमिसाइल का लाभ लिया है, उसके प्रमाणपत्रों की वैधानिकता और पात्रता की पूरी जांच अनिवार्य है।

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि-
1. राउंड-1 और राउंड-2 में आरक्षित श्रेणी अथवा डोमिसाइल के आधार पर सीट प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का भौतिक एवं डिजिटल सत्यापन कराया जाए।
2. संदिग्ध जाति एवं स्थायी निवास प्रमाणपत्रों को संबंधित जिलाधिकारी/सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से सत्यापित कराया जाए।
3. गलत प्रमाणपत्र पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थी का प्रवेश नियमानुसार निरस्त किया जाए तथा कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
4. HNBUMU तथा काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
5. यदि किसी स्तर पर प्रमाणपत्र जारी करने, सत्यापन करने अथवा सीट आवंटित करने में जानबूझकर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
6. आरक्षित सीटों के आवंटन में अनियमितताओं की शिकायतों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
7. जांच की स्थिति और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
8. प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी किए बिना अगली काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले सरकार स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करे।

यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड के मेधावी और वास्तविक रूप से पात्र युवाओं के अधिकारों की कीमत पर किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती। मेडिकल शिक्षा में प्रवेश जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का अक्षरशः पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस पूरे प्रकरण में अब तक किन अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है और यदि अनियमितताएं पहले भी हुई हैं तो पिछले वर्षों की काउंसलिंग का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उत्तराखंड सरकार इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। सरकार को निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी और पात्र उत्तराखंड के युवाओं के अधिकारों की रक्षा करनी होगी।


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