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बेटियां क्यों हो रही हैं बहकावे का शिकार! लव जिहाद पर मोहन भागवत का गंभीर सवाल, परिवार, समाज और कानून को निभानी होगी साझा जिम्मेदारी

  • Awaaz Desk
  • January 04, 2026
Why are daughters falling prey to seduction? Mohan Bhagwat raises a serious question about love jihad. Family, society, and the law must share responsibility.

नई दिल्ली। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लव जिहाद को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। भोपाल के शिवनेरी भवन में आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि लव जिहाद पर रोकथाम की शुरुआत परिवार और घरों से होनी चाहिए। भगवत ने कहा कि हमें यह विचार करना चाहिए कि हमारी बेटी किसी अजनबी के बहकावे में कैसे आ सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि परिवार के सदस्यों के बीच आपसी मेलजोल की कमी और संवाद का अभाव इस समस्या का कारण है। उन्होंने कहा कि जब परिवार के भीतर नियमित संवाद होता है, तो धर्म, संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान स्वाभाविक रूप से विकसित होता है। इतना ही नहीं उन्होंने लव जिहाद रोकने के लिए तीन कदम भी सुझाए हैं। इसमें पहला तो परिवार के अंदर निरंतर संवाद, दूसरा लड़कियों में सावधानी और आत्मरक्षा की भावना पैदा करना और तीसरा ऐसे अपराध करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई। भागवत ने यह भी कहा कि सामाजिक संगठनों को ऐसी गतिविधियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। मोहन भगवत ने कहा कि जब समाज सभ्य होने की बात करता है, तो महिलाओं की भूमिका केंद्रीय कारक बन जाती है। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारी सामाजिक व्यवस्था केवल महिलाओं की वजह से ही सुरक्षित हैं। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने आगे कहा कि वह समय बीत चुका है जब महिलाओं को केवल सुरक्षा कारणों से घर तक सीमित रखा जाता था। आज पुरुष और महिलाएं दोनों मिलकर परिवार और समाज को आगे बढ़ाते हैं, इसलिए दोनों का ज्ञानवर्धन आवश्यक है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में प्रगति कर रही हैं, लेकिन इसे और मजबूत करने की जरूरत है। लैंगिक भेदभाव और उत्पीड़न पर बोलते हुए भगवत ने कहा कि वेस्टर्न सोसायटी में शादी के बाद ही स्त्री का दर्जा तय होता है, जबकि भारतीय परंपरा में मातृत्व से स्त्री का दर्जा ऊंचा होता है। भगवत ने तर्क दिया कि मातृत्व हमारे मूल्यों का मूल है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के नाम पर थोपा गया पश्चिमीकरण एक अंधाधुंध दौड़ है। इसलिए, बचपन से ही बच्चों को जो मूल्य सिखाए जा रहे हैं, उन पर गंभीरता से विचार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


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