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पीएम मोदी ने पड़ोसी देशों को भी दिया खास संदेश! बांग्लादेश के हालात पर जताई चिंता

editor
  • Tapas Vishwas
  • August 15, 2024 11:08 AM
PM Modi also gave a special message to the neighboring countries! Expressed concern over the situation in Bangladesh

विकसित और मजबूत भारत से दुनिया को डरने की जरूरत नहीं है। लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के तेजी से विकास को लेकर चिंतित देशों को भरोसा दिया कि किसी को नुकसान पहुंचाना भारत की फितरत नहीं है।

भारत की ऐतिहासिक परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हम विश्व में समृद्ध थे तब भी, हमने कभी दुनिया को युद्ध में नहीं झोंका है। हम बुद्ध का देश हैं, युद्ध हमारी राह नहीं है। पीएम मोदी ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई और सुख-शांति की कामना की।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत के साथ-साथ चुनौतियों का बढ़ना स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन भारत के संस्कारों और हजारों सालों के इतिहास को देखते हुए दुनिया के देशों को भारत की बढ़ती ताकत को अपने लिए संकट के रूप में नहीं लेना चाहिए और उसमें रुकावट डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं ऐसी शक्तियों को कहना चाहता हूं भारत का विकास किसी के लिए संकट ले करके नहीं आता है। उन्होंने कहा कि भारत में पूरी मानव जाति का कल्याण का साम‌र्थ्य है। प्रधानमंत्री ने दुनिया के देशों को भारत की इन कोशिशों के साथ जुड़ने का आह्वान किया। वैसे प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी साफ कर दिया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास यात्रा को रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां कितनी ही क्यों न हों, चुनौती को चुनौती देना, ये हमारी फितरत में है। न हम डिगेंगे, न हम थकेंगे, न हम रुकेंगे, न हम झुकेंगे। हम संकल्पों की पूर्ति के लिए, राष्ट्र के सपनों को साकार करने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने हर बदनीयत वालों का दिल नेकनीयत से जीतने का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से बांग्लादेश में हुई ताजा घटनाओं पर चिंता के साथ ही हालत जल्द ही सामान्य होने की उम्मीद जताई। कहा कि पूरे भारत की चिंता वहां रह रहे हिंदुओं और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर है। लेकिन इसके बावजूद भारत चाहता है कि हमारे पड़ोसी देश सुख और शांति के मार्ग पर चलें। उन्होंने इसे शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और संस्कार बताया।


 


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